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ईरान के चक्रव्यूह में फंसे डोनाल्ड ट्रंप, क्या अब युद्धविराम ही आखिरी रास्ता?

Tehran, Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से मोर्चा लेकर शायद खुद के लिए ही मुश्किलें खड़ी कर ली हैं। मौजूदा जंग में अमेरिका जिस तरह फंसा नजर आ रहा है, उससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रंप की नीतियों की तीखी आलोचना हो रही है।

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Tehran, Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से मोर्चा लेकर शायद खुद के लिए ही मुश्किलें खड़ी कर ली हैं। मौजूदा जंग में अमेरिका जिस तरह फंसा नजर आ रहा है, उससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रंप की नीतियों की तीखी आलोचना हो रही है। हालात ये हैं कि व्हाइट हाउस और तेहरान के नेतृत्व की ओर से बिल्कुल अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। एक तरफ ट्रंप सार्वजनिक मंचों से कह रहे हैं कि ईरान की सैन्य ताकत लगभग खत्म हो चुकी है और वहां के नेता बातचीत के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं, वहीं हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

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पर्दे के पीछे की खबरें बताती हैं कि तेहरान ने फिलहाल वाशिंगटन के साथ संवाद के सारे दरवाजे बंद कर दिए हैं। सैन्य मोर्चे पर भी ट्रंप प्रशासन और पेंटागन का दावा है कि उन्होंने ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को 95 प्रतिशत तक ध्वस्त कर दिया है। इसके उलट, इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। इस टकराव का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान की मजबूत स्थिति ने कच्चा तेल और गैस की कीमतों में आग लगा दी है। वहीं, जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों ने इस जंग को नाटो का हिस्सा मानने से इनकार कर कर ट्रंप के अंतरराष्ट्रीय गठबंधन की कोशिशों को बड़ा झटका दिया है।

अमेरिका बोला- बात कर लो, ईरान ने कहा अभी नहीं

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप के करीबी और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने पिछले हफ्ते ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची को बातचीत का न्योता भेजा था। लेकिन, ईरान ने इन संदेशों का कोई जवाब देना भी मुनासिब नहीं समझा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के सख्त रुख की वजह से इन संदेशों को नजरअंदाज किया गया है। ईरानी नेतृत्व का मानना है कि फिलहाल अमेरिका से सीधी बात करना मुमकिन नहीं है और युद्धविराम का फैसला सिर्फ सर्वोच्च नेता के विवेक पर ही निर्भर है।

ईरान ने कहा- हमने कभी युद्धविराम की पहल नहीं की

बयानों की इस जंग में अमेरिकी अधिकारी दावा कर रहे हैं कि खुद ईरानी विदेश मंत्री अरागची ने बातचीत की पहल की थी। हालांकि, अरागची ने सोशल मीडिया पर इन दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। उन्होंने अमेरिका पर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि ईरान ने न तो युद्धविराम मांगा है और न ही बातचीत की कोई गुहार लगाई है। अरागची ने स्पष्ट किया कि वे अपनी रक्षा के लिए तब तक लड़ेंगे जब तक जरूरत होगी। ईरानी खेमे का आरोप है कि अब ट्रंप प्रशासन इस युद्ध से सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहा है।

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