Tehran, (Iran): ईरान में इस्लामी शासन के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों को कुचलने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा की गई अमानवीय बर्बरता की विस्तृत रिपोर्ट सामने आई है। प्रत्यक्षदर्शियों और मानवाधिकार संगठनों के दावों के अनुसार, ईरानी शासन ने महिलाओं की आवाज दबाने के लिए बलात्कार, शारीरिक यातना और अंग-भंग जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि हिरासत में ली गई महिलाओं को न केवल निर्वस्त्र किया गया, बल्कि उनके संवेदनशील अंगों को निशाना बनाकर उन्हें सार्वजनिक रूप से दंडित करने का प्रयास किया गया।
शारीरिक और मानसिक यातना की पराकाष्ठा
सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारी महिलाओं के साथ जो किया वह किसी भी सभ्य समाज के लिए कल्पना से परे है। कुछ महिलाओं के गर्भाशय निकाले गए, सिर की खाल नोच दी गई और शरीर को सिगरेट से दागा गया। बच्चों तक को इस हिंसा से नहीं बख्शा गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घायल युवतियों को एक-दूसरे के ऊपर फेंककर उन्हें बलात्कार की धमकियां दी जाती थीं। अत्याचार के सबूत मिटाने के लिए शवों को परिजनों को सौंपने के बजाय जला दिया गया।
विदेशी साजिश बताकर हिंसा को जायज ठहराने की कोशिश
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इन प्रदर्शनों को विदेशी साजिश और तख्तापलट की कोशिश करार दिया है। प्रदर्शनों को दबाने के लिए इंटरनेट बंद कर दिया गया और आईआरजीसी (IRGC) के साथ-साथ हजारों बाहरी लड़ाकों को तैनात किया गया। आंकड़ों के अनुसार, इस हिंसा में अब तक 3,000 से 5,000 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि हजारों मामलों की जांच अभी भी लंबित है।
झुकने को तैयार नहीं ईरानी आवाम
इतनी क्रूरता और अपनों को खोने के गम के बावजूद ईरान की जनता पीछे हटने को तैयार नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भले ही पूरा देश कब्रिस्तान जैसा महसूस हो रहा हो, लेकिन वे झुकेंगे नहीं। हिजाब से इनकार और शासन के प्रतीकों को जलाने जैसे विरोध के तरीकों ने खामेनेई शासन की नींव हिला दी है, जिसके जवाब में यह खूनी दमन चक्र चलाया जा रहा है।
इस खबर को भी पढ़ें : ईरान हिंसा में 4 हजार से ज्यादा मौ’तों का दावा, दावोस का निमंत्रण रद्द



