Tehran, (Iran): मध्य पूर्व में युद्ध की आहट के बीच इस बार मुकाबला बारूद और फाइटर जेट्स से आगे निकलकर ‘अदृश्य तरंगों’ तक पहुँच गया है। ईरान ने अपनी रक्षा प्रणाली में ‘कोबरा V8’ (Kobra V8) नामक एक ऐसा घातक हथियार शामिल किया है, जिसे रक्षा विशेषज्ञ ‘अदृश्य दीवार’ कह रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों और घातक ड्रोन्स को हवा में ही खिलौना बनाकर बेकार करने की क्षमता रखता है।

क्या है ‘कोबरा V8’ की ताकत?

कोबरा V8 ईरान की इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस और जैमिंग क्षमता का सबसे आधुनिक रूप है। इसे रूस के विख्यात ‘क्रासुखा’ (Krasukha) सिस्टम का ईरानी संस्करण माना जा रहा है। यह प्रणाली लगभग 250 से 300 किलोमीटर के दायरे में दुश्मन के रडार, रेडियो सिग्नल और सैटेलाइट संचार को पूरी तरह बाधित कर सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन के ‘अर्ली वार्निंग’ विमानों (AWACS) और लड़ाकू विमानों के रडार को ‘अंधा’ करना है।

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

जब कोबरा V8 सक्रिय होता है, तो यह दुश्मन के पायलटों की स्क्रीन पर या तो सब कुछ धुंधला कर देता है या फिर हजारों फर्जी टारगेट दिखाने लगता है। इससे दुश्मन के लिए सही निशाना लगाना नामुमकिन हो जाता है। इसके अलावा, आधुनिक युद्ध के सबसे बड़े खतरे यानी ‘ड्रोन स्वार्म’ (ड्रोन्स का झुंड) को भी यह सिस्टम उनके कंट्रोल सिग्नल और जीपीएस जाम कर दिशाहीन कर देता है।

बदल गया सामरिक संतुलन

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच इसकी तैनाती ने कूटनीतिक हलचल बढ़ा दी है। यदि अमेरिका के F-35 जैसे स्टेल्थ फाइटर या MQ-9 रीपर जैसे आधुनिक ड्रोन ईरानी हवाई क्षेत्र के करीब आते हैं, तो कोबरा V8 उनके सेंसर्स को जाम कर उन्हें निष्क्रिय कर सकता है।

अमेरिका का पलटवार: क्या है तोड़?

पेंटागन इस खतरे से बेखबर नहीं है। अमेरिका ने इसके जवाब में ‘इलेक्ट्रॉनिक अटैक एयरक्राफ्ट’ और नए ‘एंग्री किटन’ (Angry Kitten) जैमिंग पॉड्स को तैनात किया है। ये सिस्टम ‘डिजिटल रेडियो फ्रीक्वेंसी मेमोरी’ तकनीक का उपयोग करते हैं, जो दुश्मन के जैमिंग सिग्नल को पकड़कर वापस उन्हीं की ओर मोड़ देते हैं। जानकारों का कहना है कि यह एक ‘सिग्नल युद्ध’ है, जहाँ जीत उसकी होगी जो पहले दुश्मन के सिग्नल को डिकोड कर पाएगा।

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