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Tehran, (Iran): मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बीच बातचीत के रास्ते खोजने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान ने एक ऐसी ‘हिटलिस्ट’ सार्वजनिक की है जिसने वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।
निशाने पर इजराइल के ‘पावर पिलर्स’
ईरानी सरकारी मीडिया द्वारा साझा की गई इस ‘किलिंग टारगेट लिस्ट’ में इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का नाम सबसे ऊपर है। इस फेहरिस्त में केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि इजराइल की सुरक्षा मशीनरी के सबसे मजबूत स्तंभ भी शामिल हैं। सूची में मोसाद प्रमुख डेविड बर्निया, रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज, आईडीएफ प्रमुख इयल जमीर और वायुसेना प्रमुख तोमर बार जैसे नाम प्रमुखता से दर्ज हैं। ईरान ने इन लक्ष्यों को निशाना बनाने की अपनी योजना को फिलहाल गुप्त रखा है, लेकिन इस कदम ने इजराइल और अमेरिका को सतर्क कर दिया है।
ऑपरेशन ‘मिडनाइट हैमर’ का बदला?
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब हाल ही में नेतन्याहू ने व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह लिस्ट पिछले साल हुए ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ और मोसाद द्वारा ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों व आईआरजीसी प्रमुख हुसैन सलामी की हत्या का जवाबी संकेत हो सकती है। अमेरिका ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर अब और अधिक सख्ती बरतेगा।
बातचीत की मेज या युद्ध का मैदान?
इस भारी तनाव के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बयान काफी अहम है। उन्होंने दावा किया है कि राष्ट्रपति ट्रंप गतिरोध तोड़ने के लिए अयातुल्ला खामेनेई से सीधे आमने-सामने की मुलाकात के लिए तैयार हैं। हालांकि, एक तरफ कूटनीतिक संवाद की पेशकश और दूसरी तरफ युद्धपोतों की तैनाती व टारगेट लिस्ट का जारी होना यह दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई कितनी गहरी है। 2026 के इस दौर में दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह कूटनीति सफल होगी या क्षेत्र किसी बड़े संघर्ष की आग में झुलसेगा।
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