अपनी भाषा चुनेें :
बटन दबाकर थोड़ा इंतज़ार करें...
New York, USA: अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में जारी वार्ता के दौरान ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के रुख पर नई चर्चा शुरू हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यदि दूसरे देशों के पास मिसाइलें हैं तो ईरान के पास भी कुछ मिसाइलें होना गलत नहीं है। वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने साफ कर दिया कि उनका देश अपने मिसाइल कार्यक्रम पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।
Read more: प्रतिबंध हटाओ, वादे निभाओ फिर होगी परमाणु स्थलों पर बातचीत: ईरान
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, युद्ध की शुरुआत में अमेरिका और इजराइल ने ईरान की मिसाइल क्षमता को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया था। हालांकि अब सामने आ रही जानकारी के मुताबिक स्विट्जरलैंड में चल रही वार्ता में बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम प्रमुख एजेंडे का हिस्सा नहीं है।
मिसाइल कार्यक्रम पर दोनों पक्ष अपने रुख पर कायम
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी कहा है कि अमेरिका-ईरान बातचीत में मिसाइल कार्यक्रम शामिल नहीं है और यह मुद्दा वार्ता की मेज पर नहीं आया। दूसरी ओर, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए मिसाइल कार्यक्रम बेहद जरूरी है और इस पर किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। ट्रंप के हालिया बयान को उनके पहले के रुख से अलग माना जा रहा है। पहले जहां अमेरिकी प्रशासन ईरान की मिसाइल क्षमता को सीमित करने की बात कर रहा था, वहीं अब ट्रंप का कहना है कि यदि अन्य देशों के पास मिसाइलें हैं तो ईरान के पास भी सीमित मिसाइल क्षमता होना अस्वाभाविक नहीं है।
परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज पर मतभेद बरकरार
मिसाइल मुद्दे के अलावा ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी अब तक विवाद का विषय बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों पर अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण की अनुमति दे और परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की गारंटी दे। वहीं तेहरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं। अमेरिका इस समुद्री मार्ग को वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए खुला और सुरक्षित रखना चाहता है, जबकि ईरान इस क्षेत्र में अपना रणनीतिक प्रभाव बनाए रखने की बात करता रहा है।
इजराइल की भूमिका भी बनी चुनौती
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा कूटनीतिक प्रयासों के सामने इजराइल की सुरक्षा चिंताएं भी एक बड़ी चुनौती हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इजराइल दक्षिणी लेबनान से सेना हटाने के लिए तैयार नहीं है और उसने हिज्बुल्लाह के पूर्ण निशस्त्रीकरण को अपनी प्रमुख शर्त बताया है।
Read more: ईरान को कौन देगा 300 अरब डॉलर? अमेरिकी विदेश मंत्री के दौरे पर टिकी नजरें
स्विट्जरलैंड में अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते की कोशिश की जाएगी। हालांकि फिलहाल मिसाइल कार्यक्रम, परमाणु विवाद, होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे प्रमुख मुद्दों पर कोई अंतिम सहमति बनती नहीं दिख रही है। ऐसे में युद्ध भले फिलहाल टल गया हो, लेकिन क्षेत्र में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

