Jakarta, Indonesia: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन देशों की उच्च स्तरीय आधिकारिक यात्रा के पहले चरण में इंडोनेशिया पहुंच चुके हैं। इस कूटनीतिक दौरे के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण सांस्कृतिक अध्याय जोड़ते हुए पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के ऐतिहासिक योग्याकर्ता शहर में स्थित लगभग 1100 साल पुराने प्रम्बानन मंदिर के भव्य दर्शन किए। इस विशेष यात्रा के दौरान उनके साथ इंडोनेशिया के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी मुख्य रूप से मौजूद रहे। दोनों राजनेताओं का यह दौरा भारत और इंडोनेशिया के बीच दो हजार साल से भी अधिक पुराने गहरे सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संबंधों को वैश्विक पटल पर एक बार फिर रेखांकित करता है।
प्राचीन विरासत का संरक्षण
PM @narendramodi and President @prabowo inaugurated the UNESCO World Heritage Prambanan Temple Compound Restoration and Conservation Project.
The temple continues to reflect the centuries-old civilisational and cultural connect between India and Indonesia. pic.twitter.com/RwXUAeHA5z
— PMO India (@PMOIndia) July 8, 2026
दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश होने के बावजूद, इंडोनेशिया ने इस्लाम के आगमन से पहले के सैकड़ों साल पुराने हिंदू और बौद्ध राजाओं के शासनकाल की ऐतिहासिक विरासत को बेहद सम्मान के साथ सहेज कर रखा है। इसी गौरवशाली इतिहास को सम्मान देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इस परिसर में स्थित एक हजार वर्ष प्राचीन मुख्य शिव मंदिर के जीर्णोद्धार (Renovation) कार्य की आधिकारिक शुरुआत भी की। यह कदम आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।
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स्थापत्य कला का बेजोड़ उदाहरण
इंडोनेशिया का सबसे बड़ा और संपूर्ण दक्षिण पूर्व एशिया के सबसे विशाल हिंदू मंदिरों में गिना जाने वाला यह प्रम्बानन मंदिर स्थापत्य कला का एक अद्भुत चमत्कार है। इतिहास के अनुसार, इसका निर्माण 9वीं सदी के मध्य में (लगभग 850 ईस्वी) संजय राजवंश के प्रतापी राजा राकाई पिकातन के शासनकाल में हुआ था। यह विशाल मंदिर परिसर मूल रूप से 240 छोटे-बड़े मंदिरों के समूह से सुसज्जित था, जिसमें सनातन धर्म की त्रिमूर्ति—भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान महेश (शिव) के मंदिर सबसे प्रमुख हैं।
दीवारों पर रामायण की नक्काशी
इस भव्य परिसर के केंद्र में लगभग 47 मीटर ऊंचा भगवान शिव का मुख्य मंदिर स्थापित है। इस मंदिर के गर्भगृह और प्रांगण में महादेव के अतिरिक्त माता पार्वती, भगवान गणेश और महर्षि अगस्त्य की प्राचीन मूर्तियां विराजमान हैं। इस ऐतिहासिक धरोहर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पत्थरों को तराशकर बनाई गई दीवारें हैं, जिन पर रामायण और भागवत पुराण की पवित्र पौराणिक कहानियों को बेहद जीवंत रूप में उकेरा गया है। वर्ष 1991 में यूनेस्को (UNESCO) द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित यह परिसर आज भी दुनिया भर के पर्यटकों और इतिहासकारों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।




