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कोडरमा के इस गांव में LPG नहीं, गोबर गैस से जल रहे चूल्हे, महिलाएं बनीं बदलाव की पहचान

Koderama News: कोडरमा के डोमचांच प्रखंड स्तिथ लक्ष्मीपुर गांव में गोबर गैस प्लांट से घरों में गैस की आपूर्ति की जा रही है। गोबर्धन योजना के तहत गोबर गैस प्लांट की यह पहल कारगर साबित हो रही है। इंधन बचाओ जीवन बचाओ के संकल्पों को

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Koderama News:  कोडरमा के डोमचांच प्रखंड स्तिथ लक्ष्मीपुर गांव में गोबर गैस प्लांट से घरों में गैस की आपूर्ति की जा रही है। गोबर्धन योजना के तहत गोबर गैस प्लांट की यह पहल कारगर साबित हो रही है।

इंधन बचाओ जीवन बचाओ के संकल्पों को साकार करते हुए कोडरमा जिले के लक्ष्मीपुर गांव में महिलाएं गोबर गैस से खाना पका रही है। इस गांव में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेज टू मे गोवर्धन योजना के तहत गोबर गैस प्लांट की स्थापना की गई है। और इसके संचालन से लेकर उपयोग तक की जिम्मेदारी महिलाओं को दी गई है।

गांव के 32 घरों में इस गोबर गैस प्लांट से पाइप के जरिए गैस की आपूर्ति की जा रही है । सुबह और शाम दो-दो घंटे गैस आपूर्ति की जाती है । गोबर गैस प्लांट के मेंटिनेस मैनेजर नीतीश राज ने बताया कि प्लांट के संचालन के लिए महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया और अब पूरी तरह से महिलाएं इसका संचालन बखूबी कर रही ह

गांव की हर महिलाएं अपने मवेशियों के गोबर लेकर प्लांट आती है और सबसे पहले उसे फीड स्टॉक टैंक में डाला जाता है। इसके बाद उसमें बराबर पानी की मात्रा मिलायी जाती है। जिसके बाद गोबर और पानी का घोल बायोगैस टैंक तक पहुंचता है । जो धूप और गर्मी से गैस के रूप में परिवर्तित होकर गांव के घरों तक पहुंचता है। महिलाओं ने बताया कि गोबर गैस प्लांट से पर्यावरण सुरक्षित होता है। क्यूंकि गांव की महिलाएं जलावनजलावन के लिए लकड़ियों का इस्तेमाल नहीं करती हैं । साथ ही बायोगैस से लोगों को काफी फायदे मिल रहे हैं।

गोवर्धन योजना के तहत इस गांव में 1500 किलोग्राम क्षमता वाले बायोगैस प्लांट की स्थापना की गई है। बायोगैस एलपीजी गैस की तुलना में काफी सुरक्षित भी माना जाता है। साथ ही गैस बनने के बाद इस्तेमाल हो चुके गोबर सूखकर खाद भी बन जाता है जो खेतों की उर्वरक क्षमता बढ़ाने में कारगर है।

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