Patna: वन्य प्राणी सप्ताह-2026 के दूसरे दिन पटना जू में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण और उससे बचाव के तरीके बताए गए। विशेषज्ञों ने कहा कि वन क्षेत्रों में कमी, प्राकृतिक आवासों में बदलाव और जलवायु परिवर्तन जैसी स्थितियां इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव बढ़ा सकती हैं। ऐसे मामलों में स्थानीय लोगों की जागरूकता के साथ समय पर रेस्क्यू और सही प्रबंधन जरूरी है।
संघर्ष रोकने में जागरूकता जरूरी
कार्यक्रम के पहले सत्र में पटना जू के वन्यजीव चिकित्सक डॉ. मनोज कुमार टोनी ने ‘मानव-वन्यजीव संघर्ष और उसके निवारण के उपाय’ विषय पर विद्यार्थियों से बातचीत की। उन्होंने बताया कि संघर्ष की स्थिति में लोगों को सतर्क रहने और वन्यजीवों से दूरी बनाए रखने के साथ समय पर रेस्क्यू की जरूरत होती है।
डॉ. टोनी ने वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से रेस्क्यू किए गए गैंडे का उदाहरण भी दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि रेस्क्यू के दौरान भीड़ को नियंत्रित करना, वन्यजीव की गतिविधियों पर नजर रखना और सुरक्षित तरीके से ट्रैंक्विलाइज करना जरूरी होता है। ट्रैंक्विलाइजेशन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई।
5,000 से ज्यादा स्तनधारी प्रजातियां
दूसरे सत्र में डॉ. दिलीप कुमार बैठा ने ‘स्तनधारियों पर संक्षिप्त चर्चा’ विषय पर विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने बताया कि दुनिया में 5,000 से अधिक स्तनधारी प्रजातियां पाई जाती हैं। इनके आकार, स्वरूप और जीवन-शैली में काफी विविधता है। उन्होंने पारिस्थितिकी तंत्र में स्तनधारियों की भूमिका और इनके संरक्षण की जरूरत पर भी बात की।
8 अक्टूबर को होगा समापन
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करना और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की समझ बढ़ाना था। वन्यप्राणी सप्ताह के तहत पटना जू में जागरूकता और शैक्षणिक गतिविधियां जारी हैं। सप्ताह का समापन समारोह 8 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा।




