Ranchi : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के सहयोग से चल रही अखिल भारतीय समन्वित मक्का अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), रांची में चल रहे शोध कार्यों की मॉनिटरिंग के लिए आईसीएआर की अनुश्रवण समिति तीन दिवसीय दौरे पर झारखंड पहुंची। समिति ने बीएयू के मक्का अनुसंधान कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की मेहनत और समर्पण की सराहना की।

समिति ने विश्वविद्यालय के पश्चिमी प्रक्षेत्र में लगाए गए मक्का के 20 प्रयोगों का निरीक्षण किया। टीम के सदस्यों ने फसल के विकास की स्थिति को “बहुत अच्छा” बताया और कहा कि बीएयू का प्रयास राज्य में मक्का उत्पादन को नई दिशा दे सकता है। 16 अक्टूबर को समिति ने हजारीबाग के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गौरिया करमा में चल रहे अनुसंधान कार्यों का भी निरीक्षण किया।

दौरे के तीसरे दिन यानी शुक्रवार को टीम ने गुमला जिले के जारी गांव का दौरा किया, जहां बीएयू जनजातीय उप योजना के तहत अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम चला रहा है। जारी, जो परमवीर चक्र विजेता लांस नायक अल्बर्ट एक्का का जन्मस्थान है, को बीएयू ने “आदर्श गांव” के रूप में अंगीकृत किया है। विश्वविद्यालय की ओर से यहां सैकड़ों किसानों को मक्का की उन्नत किस्मों के बीज वितरित किए गए हैं ताकि कृषि उत्पादन और आय में सुधार लाया जा सके।

समिति में शामिल वैज्ञानिकों में गोविंद वल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर (उत्तराखंड) के डॉ. एन.के. सिंह, भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद की डॉ. पी.एल. सौजन्या, बिधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय, कल्याणी (पश्चिम बंगाल) की डॉ. श्राबनी देबनाथ और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के डॉ. महेश कुमार शामिल थे।

बीएयू के पौधा प्रजनन एवं आनुवंशिकी विभाग की अध्यक्ष और मक्का परियोजना की प्रधान अन्वेषक डॉ. मणिगोपा चक्रवर्ती तथा डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने टीम को प्रयोगों और परियोजनाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी दी। समिति ने अनुसंधान निदेशक डॉ. पी.के. सिंह से भी मुलाकात कर विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर संतोष व्यक्त किया।

उल्लेखनीय है कि बीएयू में मक्का अनुसंधान से जुड़ी यह परियोजना वर्ष 2005 से निरंतर चल रही है इस परियोजना के तहत झारखंड की जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप मक्का की बेहतर और उच्च उत्पादक किस्में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे राज्य के किसानों को नई तकनीकों का लाभ मिल सके और उत्पादन में वृद्धि हो।

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