UP News: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में “आई लव मोहम्मद” पोस्टर को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़ी समस्या बन चुका है। दरअसल, 10 सितंबर को कानपुर के रावतपुर में सैय्यद नगर मोहल्ले में एक पोस्टर लगाया गया था। पोस्टर में लिखा था “आई लव मोहम्मद”, लेकिन विवाद इसकी सामग्री को लेकर नहीं, बल्कि गलत जगह पर पोस्टर लगाने के कारण शुरू हुआ। कुछ लोगों ने इस घटना को गलत तरीके से प्रचारित किया और इसे धार्मिक विवाद का रूप दे दिया।
काशीपुर में बवाल
उत्तराखंड के काशीपुर में भी इसी विवाद ने तूल पकड़ लिया। पुलिस ने नामजद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए तीन के खिलाफ और 500 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। स्थानीय प्रशासन और पुलिस लोगों को समझाने-बुझाने में जुटी हुई है, लेकिन कुछ लोगों ने इसे भड़काकर सार्वजनिक प्रदर्शन किया।
पुलिस पर हमला
घटना की पृष्ठभूमि यह है कि रावतपुर में बारावफात की सजावट के तहत पोस्टर लगाया गया था। विवाद होने पर पुलिस ने पोस्टर को हटाकर कार्यक्रम स्थल के पास लगा दिया। इसके अगले दिन कुछ युवकों ने पोस्टर फाड़ दिया। 10 सितंबर को इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन इसे “आई लव मोहम्मद” के खिलाफ मामला बताकर प्रचारित किया गया। इसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विरोध स्वरूप जुलूस निकाला और अपने घरों तथा दुकानों पर पोस्टर चिपकाना शुरू कर दिया।
500 से ज्यादा लोगों के खिलाफ FIR
काशीपुर में भी इसी तरह का जुलूस निकाला गया। करीब 500 लोगों की भीड़ नारेबाजी करते हुए सड़कों पर निकली। कोतवाली के एसएसआई अनिल जोशी ने बताया कि मोहल्ला अल्ली खां क्षेत्र में बिना अनुमति नदीम अख्तर, अनीस गांधी और दानिश चौधरी के नेतृत्व में जुलूस निकाला गया। पुलिस ने इसे रोकने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। दो पुलिसकर्मियों को दौड़ाकर पीटा गया और 112 गाड़ी पर पथराव किया गया, जिससे शीशे टूट गए।
पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया। इसके अलावा 500 से अधिक लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि विवाद को लेकर गलतफहमी ने इसे और तूल दिया। पोस्टर का संदेश किसी धर्म के खिलाफ नहीं था, लेकिन गलत जगह पर लगाने और सोशल मीडिया पर गलत प्रचार के कारण मामला हिंसक हो गया।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के विवाद अक्सर सोशल मीडिया और अफवाहों के कारण बढ़ते हैं। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों में न फंसें और शांति बनाए रखें।
इस घटना ने यह भी दिखाया कि किसी छोटी गलती या गलत जगह पर किसी संवेदनशील सामग्री का प्रयोग किस तरह बड़े विवाद का कारण बन सकता है। पुलिस और प्रशासन अब ऐसे मामलों में सख्ती बढ़ाने और अफवाहों पर रोक लगाने के लिए योजना बना रहे हैं।



