चैनपुर (गुमला): चैनपुर प्रखंड मुख्यालय में शनिवार को मानवता और संवेदनशीलता की एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली। दुख की घड़ी में जनप्रतिनिधियों ने आगे बढ़कर एक शोकाकुल परिवार का सहारा बनते हुए सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया।

जानकारी के अनुसार, चैनपुर निवासी मंगरा रौतिया के पुत्र बीरेन्द्र रौतिया पिछले कुछ समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनका इलाज रांची में चल रहा था, लेकिन उपचार के दौरान उनका आकस्मिक निधन हो गया। युवक की असमय मौत की खबर मिलते ही परिवार में शोक की लहर दौड़ गई और परिजन गहरे सदमे में आ गए।

घटना की सूचना मिलते ही जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा तथा चैनपुर की मुखिया शोभा देवी पीड़ित परिवार के घर पहुंचीं। दोनों जनप्रतिनिधियों ने शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और इस कठिन समय में धैर्य बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

परिवार की तत्काल जरूरतों को देखते हुए जनप्रतिनिधियों द्वारा राहत स्वरूप चावल सहित अन्य आवश्यक राशन सामग्री उपलब्ध कराई गई। साथ ही दैनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नकद आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई, ताकि संकट की इस घड़ी में परिवार को कुछ राहत मिल सके।

मुखिया शोभा देवी ने परिजनों को आश्वस्त किया कि भविष्य में भी सरकारी योजनाओं तथा अन्य उपलब्ध माध्यमों से परिवार को हरसंभव सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा। वहीं जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा ने कहा कि इस दुख की घड़ी में वे पूरी तरह पीड़ित परिवार के साथ खड़ी हैं। उन्होंने कहा कि बीरेन्द्र रौतिया का असमय निधन अत्यंत दुखद है और उनकी प्राथमिकता है कि परिवार को किसी प्रकार की असुविधा या अभाव का सामना न करना पड़े।

जनप्रतिनिधियों की इस संवेदनशील पहल और त्वरित सहयोग की स्थानीय ग्रामीणों ने सराहना करते हुए इसे मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

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