Ranchi: देश और दुनिया की दिग्गज एयरलाइंस कंपनियों में पायलट बनने का सपना आज के समय में कई युवाओं का रहता है। इस पेशे के प्रति आकर्षण की सबसे बड़ी वजह यह है कि इसमें बेहद शानदार सैलरी (पैसा) होने के साथ-साथ पूरी दुनिया को मुफ्त में करीब से देखने और घूमने का एक बेहतरीन अवसर मिलता है। हालांकि, पायलट बनना इतना आसान काम नहीं है, क्योंकि इसकी पढ़ाई और ट्रेनिंग में काफी ज्यादा पैसा खर्च होता है। अगर आप भी आसमान में उड़ान भरना चाहते हैं, तो भारत में पायलट बनने के मुख्य रूप से दो तरीके मौजूद हैं:
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पायलट बनने के दो रास्ते
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फ्लाइंग एकेडमी (उड़ान अकादमी): पहला तरीका यह है कि आप देश या विदेश की किसी मान्यता प्राप्त फ्लाइंग एकेडमी से जुड़कर पायलट का कोर्स पूरा करें। वहां से ट्रेनिंग लेने के बाद आपको स्टूडेंट पायलट लाइसेंस (SPL), प्राइवेट पायलट लाइसेंस (PPL) और अंत में कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) हासिल करना होता है।
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कैडेट पायलट प्रोग्राम: दूसरा तरीका यह है कि आप किसी बड़ी एयरलाइंस कंपनी के आधिकारिक कैडेट प्रोग्राम का हिस्सा बन जाएं। कई एयरलाइंस कंपनियां खुद युवाओं को चुनकर उन्हें पायलट की ट्रेनिंग देती हैं और कोर्स पूरा होने के बाद अपने यहां नौकरी पर रख लेती हैं।
क्या होनी चाहिए जरूरी योग्यता?
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आयु सीमा: पायलट कोर्स के लिए आवेदन करते समय उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए।
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शैक्षणिक योग्यता: छात्र का भौतिक विज्ञान (Physics) और गणित (Maths) विषयों के साथ कम से कम 50 फीसदी अंकों से 12वीं पास होना अनिवार्य है।
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शारीरिक फिटनेस: इसके अलावा, उम्मीदवार का मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट होना सबसे जरूरी शर्त है।
मेडिकल सर्टिफिकेट है सबसे जरूरी कड़ा नियम
पायलट की वास्तविक ट्रेनिंग शुरू करने से पहले छात्रों को दो बेहद कड़े मेडिकल टेस्ट से गुजरना पड़ता है, जो महानिदेशक नागरिक उड्डयन (DGCA) के नियमों के तहत अनिवार्य हैं:
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क्लास 2 मेडिकल सर्टिफिकेट: पायलट की शुरुआती ट्रेनिंग से पहले स्टूडेंट के पास क्लास 2 मेडिकल सर्टिफिकेट होना चाहिए। यह सर्टिफिकेट डीजीसीए से मान्यता प्राप्त डॉक्टर पूरी जांच के बाद जारी करते हैं और यह प्रमाणित करते हैं कि व्यक्ति फ्लाइंग ट्रेनिंग लेने के लिए मेडिकली फिट है या नहीं।
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क्लास 1 मेडिकल एग्जाम: इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण क्लास 1 मेडिकल एग्जाम होता है। इसे स्वयं डीजीसीए ही आयोजित करवाता है और इस टेस्ट को इंडियन एयरफोर्स (भारतीय वायुसेना) से मान्यता प्राप्त डॉक्टर ही करते हैं।
भारत में कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) पाने के लिए इस क्लास 1 मेडिकल एग्जाम का पासिंग सर्टिफिकेट होना बेहद जरूरी होता है। इस बेहद कड़े और विस्तृत मेडिकल चेकअप में उम्मीदवार की आंख (विजन टेस्ट), ईसीजी (हार्ट टेस्ट), ब्लड टेस्ट और नाक-कान-गले (ENT) की बहुत ही बारीकी से जांच शामिल होती है। इन सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही किसी युवा को कमर्शियल विमान उड़ाने की अनुमति मिलती है।
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