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India News: नई दिल्ली की हवा में इन दिनों एक नई चर्चा तेज़ है- क्या हेल्थ इंश्योरेंस आखिरकार सस्ता होने वाला है? हर साल प्रीमियम बढ़ने से परेशान लोगों के लिए सरकार अब एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। पिछले कुछ सालों में, खासकर कोविड के बाद से, हेल्थ पॉलिसियों की कीमतें इतनी बढ़ी हैं कि आम आदमी के बजट में सीधा असर पड़ा है।
प्रीमियम पर सीमा तय करने का प्रस्ताव, एजेंट कमीशन पर भी कैप
सरकार को सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि इंश्योरेंस कंपनियां बिना किसी स्थाई मानक के हर साल प्रीमियम बढ़ा देती हैं। इसलिए अब योजना बन रही है कि इस बढ़ोतरी पर एक तय सीमा लगाई जाए। इसके साथ-साथ यह प्रस्ताव भी है कि नई पॉलिसी पर एजेंट कमीशन अधिकतम 20% तक और रिन्यूअल पर 10% तक सीमित किया जाए। मेडिकल इन्फ्लेशन भारत में 11.5% है- यानी अस्पतालों में इलाज का खर्च हर साल इसी रफ्तार से बढ़ रहा है। ऐसे में प्रीमियम बढ़ने का तर्क कंपनियां देती जरूर हैं, लेकिन वित्त मंत्रालय का कहना है कि यह बढ़ोतरी अब “मनमानी” हो चुकी है और इसे नियंत्रित करना ज़रूरी है।
अस्पताल पैकेज रेट पर भी नकेल, पारदर्शिता की मांग
बीमा नियामक इरडा, अस्पतालों और बीमा कंपनियों के साथ सरकार की हालिया बैठक में एक और मुद्दा जोरदार तरीके से उठा- फर्जी या बढ़े हुए पैकेज रेट। मंत्रालय चाहता है कि हर क्लेम, हर बिल और हर डिस्चार्ज समरी बिल्कुल पारदर्शी तरीके से बीमा पोर्टल पर उपलब्ध हो। अस्पतालों का कहना है कि उनके मुनाफे पहले ही कम हैं, जबकि बीमा कंपनियां क्लेम देने में कटौती करती हैं। इस पर सरकार का जवाब साफ था- इसीलिए नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज लाया जा रहा है, जहां पूरी प्रक्रिया डिजिटल और मॉनिटर होगी। सरकार की इन तैयारियों से आम लोगों को भविष्य में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

