Hazaribagh News: झारखंड के स्वास्थ्य महकमे की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर किसी का भी कलेजा कांप जाए।

कोयलांचल के अस्पताल में ‘अंधेर नगरी’; जब मोबाइल टॉर्च ही बन गई ऑपरेशन थिएटर की लाइट

हजारीबाग जिले के केरेडारी प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एक महिला का परिवार नियोजन ऑपरेशन मोबाइल की टॉर्च जलाकर किया गया। यह घटना उस इलाके की है जहां से राज्य को करोड़ों का कोयला राजस्व मिलता है, लेकिन वहां के सरकारी अस्पताल में एक अदद जनरेटर तक नसीब नहीं है। इस खौफनाक मंजर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया है।

ऑपरेशन टेबल पर तड़पती मरीज और अंधेरे में चीर-फाड़

बताया जा रहा है कि जब महिला ऑपरेशन टेबल पर थी, तभी अचानक बिजली गुल हो गई। कायदे से अस्पताल में पावर बैकअप या जनरेटर की सुविधा होनी चाहिए थी, लेकिन सुविधाओं के नाम पर वहां सन्नाटा था। मजबूरन डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने अपने मोबाइल निकाले और उनकी टॉर्च जलाकर ऑपरेशन की प्रक्रिया जारी रखी। मरीज की जान दांव पर थी और डॉक्टर मोबाइल की कम रोशनी में ही ‘सर्जरी’ निपटाने में जुटे रहे। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है, यहां अक्सर मरीजों को राम भरोसे छोड़ दिया जाता है।

बाबूलाल मरांडी का इरफान अंसारी पर प्रहार; अस्पताल प्रबंधन की सफाई

इस वीडियो के वायरल होते ही सूबे की सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को आड़े हाथों लेते हुए सवाल किया कि क्या यही झारखंड का बदला हुआ स्वास्थ्य ढांचा है? इधर, मामले को तूल पकड़ता देख अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ. नसीफ अंजुम बचाव की मुद्रा में नजर आए। उन्होंने वीडियो को पुराना बताया और दावा किया कि बिजली जाने पर तुरंत जनरेटर चालू कर दिया गया था। हालांकि, वायरल वीडियो प्रभारी के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है, जिसमें साफ दिख रहा है कि मोबाइल की रोशनी के बीच गंभीर ऑपरेशन किया जा रहा है।

प्रशासन अब जांच की बात कह रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी की जान इतनी सस्ती है कि उसे तकनीकी कमियों के नाम पर अंधेरे में धकेल दिया जाए? केरेडारी की जनता अब जवाब मांग रही है।

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