Khunti : बिरसा मुंडा कॉम्प्लेक्स में आज धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती एवं झारखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस विशेष अवसर पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन तथा जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के मंत्री जुएल ओराम सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और ग्रामीण मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत धरती आबा बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड वीरों और शहीदों की धरती है। जिनके संघर्ष और बलिदान से राज्य का निर्माण संभव हुआ, उनके सपनों का झारखंड बनाना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु बाबा शिबू सोरेन आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके मार्गदर्शन और आदर्शों से प्रेरित होकर राज्य सरकार पूरे समर्पण से आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार गांवों तक पहुंचकर आमलोगों की समस्याओं को समझने और दूर करने का कार्य कर रही है। आदिवासी एवं जनजातीय समुदायों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए कई महत्वाकांक्षी योजनाओं का संचालन जारी है। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी विकास योजनाओं में गांव, गरीब, किसान, माताओं और बहनों को सबसे ऊपर रखकर कार्य कर रही है। राज्य का लगभग 50% सरकारी व्यय सीधे महिलाओं और ग्रामीण विकास से जुड़े क्षेत्रों पर किया जा रहा है।

महिला सशक्तिकरण पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले यहां के लोगों को शिक्षा और इलाज के लिए कर्ज लेना पड़ता था, लेकिन हमारी सरकार इस स्थिति को बदलने के लिए निरंतर प्रयासरत है। शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, पर्यटन और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में बड़े स्तर पर योजनाएं तैयार की जा रही हैं। आने वाले दिनों में रोजगार सृजन और युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि आज झारखंड 25 वर्ष का युवा राज्य है और यहां की नई पीढ़ी राज्य के भविष्य की दिशा तय करेगी। सरकार का लक्ष्य है कि विकास की रोशनी हर परिवार तक पहुंचे और हर घर में खुशहाली आए। मुख्यमंत्री ने अंत में राज्य स्थापना दिवस पर सभी को शुभकामनाएं दीं और धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा को नमन किया।

कार्यक्रम में कई माननीय विधायक, वरिष्ठ अधिकारी, बिरसा मुंडा के वंशज सुखराम मुंडा तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। पूरे आयोजन में सांस्कृतिक और पारंपरिक उत्साह का विशेष माहौल देखने को मिला।

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