पलामू: महाशिवरात्रि का त्यौहार श्रद्धा और उल्लास का प्रतीक होता है, लेकिन पलामू जिले के पांकी प्रखंड स्थित रघुआखाड़ गांव के लिए यह सोमवार काफी भारी रहा। द्वारिका पंचायत में आयोजित पारंपरिक मेले में घूमने गए बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। मिली जानकारी के अनुसार, रविवार को महाशिवरात्रि के मौके पर रघुआखाड़ में भव्य मेले का आयोजन था। आस-पास के यादव टोला और जमुआटांड़ सहित कई गांवों के लोग सपरिवार यहाँ पहुंचे थे। बच्चों ने बड़े चाव से मेले में लगे ठेले पर गोलगप्पे खाए। लेकिन किसे पता था कि यह स्वाद अस्पताल की चौखट तक ले जाएगा। रविवार रात से ही बच्चों को लगातार उल्टी, दस्त और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) की शिकायत होने लगी। सोमवार सुबह होते-होते स्थिति इतनी बिगड़ गई कि बच्चों के परिजनों में चीख-पुकार मच गई।

स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही पांकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की टीम एंबुलेंस के साथ गांव पहुंची। सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने गांव में कैंप लगाकर करीब 100 बच्चों की स्क्रीनिंग की, जिनमें से 20 बच्चों की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। पांकी के चिकित्सा प्रभारी डॉ. महेंद्र प्रसाद खुद पूरी स्थिति पर नजर रख रहे हैं। राहत की बात यह है कि समय पर इलाज मिलने से सभी बच्चों की स्थिति अब खतरे से बाहर और नियंत्रण में बताई जा रही है।

प्रशासन और जनप्रतिनिधि सक्रिय

इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। पांकी विधायक डॉ. शशि भूषण मेहता के प्रतिनिधियों सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अस्पताल पहुंचकर बच्चों का हालचाल जाना। ग्रामीणों का कहना है कि मेले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की शुद्धता की जांच न होने के कारण ऐसी घटनाएं होती हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अब ग्रामीणों से अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर खुले में बिकने वाली खाने-पीने की चीजों से परहेज करें और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। फिलहाल रघुआखाड़ गांव में मेडिकल टीम तैनात है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

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