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यहां ना सड़कें हैं ना कारें, सिर्फ बत्तखों की आवाज, नाव पर ऑफिस: नॉर्थ वेनिस की कूल लाइफ!

Nuk, Netherlands: सोचिए अगर आप किसी ऐसी जगह हों जहां आप सुबह सोकर उठें और खिड़की खोलें तो आपको हॉर्न के शोर की जगह बत्तखों की आवाज और पानी की धीमी कल-कल सुनाई दे। आप ऑफिस जाने के लिए बाहर निकलते हैं, लेकिन गैरेज में

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Nuk, Netherlands: सोचिए अगर आप किसी ऐसी जगह हों जहां आप सुबह सोकर उठें और खिड़की खोलें तो आपको हॉर्न के शोर की जगह बत्तखों की आवाज और पानी की धीमी कल-कल सुनाई दे। आप ऑफिस जाने के लिए बाहर निकलते हैं, लेकिन गैरेज में कार नहीं, एक छोटी सी इलेक्ट्रिक बोट खड़ी मिले। यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि नीदरलैंड के गिएथूर्न इलाके की हकीकत है। गिएथूर्न की लाइफस्टाइल इतनी कूल है कि इसे नॉर्थ का वेनिस कहा जाता है। आज की दुनिया में दो समस्याएं सबसे बड़ी हैं—एक ग्लोबल वॉर्मिंग और दूसरी मानसिक तनाव। गिएथूर्न की सुकून वाली जिंदगी इन दोनों का समाधान है।

नीदरलैंड के गिएथूर्न गांव की लाइफस्टाइल है कूल, इसे नॉर्थ का वेनिस कहा जाता है

जब हम किसी शहर के बारे में सोचते हैं, तो दिमाग में फ्लाईओवर, ट्रैफिक सिग्नल और प्रदूषण का नजारा सामने आता है, लेकिन गिएथूर्न ने दुनिया को दिखाया है कि बिना सड़कों के भी जिंदगी शानदार हो सकती है। इस पूरे गांव के मुख्य हिस्से में एक भी सड़क नहीं है। यहां एक घर से दूसरे घर तक जाने के लिए या तो आपको नाव का सहारा लेना पड़ता है, या फिर उन 170 से ज्यादा लकड़ी के छोटे-छोटे पुलों पर पैदल चलना होगा जो नहरों के ऊपर बनाए गए हैं। यहां के लोग अपनी ग्रॉसरी से लेकर फर्नीचर तक सब कुछ नावों के जरिए ही इधर-उधर ले जाते हैं। यहां की शांति किसी थेरेपी से कम नहीं।

व्हिस्पर बोट्स व इलेक्ट्रिक जीवन

यहां की सरकार ने सड़कों के प्रस्ताव को ठुकरा दिया ताकि उनकी शांति भंग न हो। यहां की नावों को व्हिस्पर बोट्स कहा जाता है। इनमें इलेक्ट्रिक मोटर लगी होती है जो बिल्कुल आवाज नहीं करतीं और न ही धुआं छोड़ती हैं। यहां की हवा इतनी शुद्ध है कि शहर से आने वाले इंसान को अपनी सांसें भारी लगने लगती हैं। गिएथूर्न में सबसे तेज आवाज जो आप सुन सकते हैं, वह पक्षी की चहचहाहट या किसी के चप्पू के पानी से टकराने की होगी। यहां लोग पैदल चलना, साइकिल और नावों की सवारी करना पसंद करते हैं। कई लोगों ने दफ्तर पहुंचने के लिए अपनी पर्सनल व्हिस्पर बोट रखी है और उन्हें दफ्तर तक पहुंचने में 10 मिनट से ज्यादा समय नहीं लगता क्योंकि यहां कोई ट्रैफिक जाम ही नहीं होता। इमरजेंसी के लिए यहां वॉटर एम्बुलेंस जरूर हैं।

यहां की जलसड़कें ही नहीं घर भी खास हैं। हर घर की छत घास-फूस से बनी है, जो 18वीं सदी की याद दिलाती है। हर घर के सामने सुंदर बगीचे हैं जो सीधे नहर के पानी से मिलते हैं। यहां की जिंदगी में एक विरोधाभास भी है। यहां की आबादी केवल 2800 लोगों की है और वे सुकून से रहना चाहते हैं लेकिन दुनिया के सबसे खूबसूरत इलाके का टैग यहां दुनियाभर से लोगों को खींच लाता है। इस छोटे से जगह हर साल दुनिया भर से 10 लाख से ज्यादा पर्यटक आते हैं। अपने बगीचे में सुकून से कॉफी पी रहे यहां के लोगों को सामने से गुजरती नाव में बैठे 50 पर्यटकों की भीड़ किसी अजूबे से कम नहीं होती।

स्लो लिविंग का राज

यहां के लोगों ने भीड़ के बावजूद अपनी प्राइवेसी को बचा कर रखा है। स्थानीय लोग और प्रशासन दोनों पर्यटकों की भीड़ के बावजूद सड़कें बनाने का विरोध करते हैं। यहां के लोग दुनिया की रैट रेस का हिस्सा नहीं हैं बल्कि सुकून से जिंदगी एंजॉय करने के लिए जाने जाते हैं। लोगों के पास वक्त ही वक्त है पड़ोसी से बात करने के लिए, साथ बैठकर चाय पीने के लिए और प्रकृति को निहारने के लिए। यहीं कारण है जहां पूरी दुनिया 5G और सुपरफास्ट ट्रांसपोर्ट के पीछे पागल है, वहीं यह गांव स्लो लिविंग को अपनाकर दुनिया का सबसे खुशहाल है।

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