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खतरे में सैटेलाइट और GPS! सूर्य पर बना ‘कैरिंगटन’ जैसा विशाल सनस्पॉट!

Washington, (US): ब्रह्मांड के सबसे बड़े ऊर्जा स्रोत सूर्य में इन दिनों जबरदस्त हलचल मची है। वैज्ञानिकों ने सूर्य की सतह पर एक अत्यंत विशाल और अस्थिर सनस्पॉट ‘रीजन 4366’ की पहचान की है, जो तेजी से फैल रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA)

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Washington, (US): ब्रह्मांड के सबसे बड़े ऊर्जा स्रोत सूर्य में इन दिनों जबरदस्त हलचल मची है। वैज्ञानिकों ने सूर्य की सतह पर एक अत्यंत विशाल और अस्थिर सनस्पॉट ‘रीजन 4366’ की पहचान की है, जो तेजी से फैल रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) और एनओएए (NOAA) के अनुसार, यह सनस्पॉट इतना शक्तिशाली है कि इसका आकार 1859 के ऐतिहासिक ‘कैरिंगटन इवेंट’ के लगभग आधा पहुँच चुका है। इस सक्रिय क्षेत्र से निकल रही ऊर्जा की लपटें धरती के संचार तंत्र और उपग्रहों के लिए बड़ी चुनौती पेश कर सकती हैं।

24 घंटे में 20 से ज्यादा विस्फोट: X8.1 श्रेणी की ज्वाला ने मचाई खलबली

सनस्पॉट 4366 की अस्थिरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले महज 24 घंटों में यहाँ से 20 से अधिक सौर ज्वालाएं (Solar Flares) निकली हैं। इनमें सबसे खतरनाक X8.1 श्रेणी की ज्वाला रविवार सुबह दर्ज की गई।

  • प्रभाव: इस विस्फोट के तुरंत बाद दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में रेडियो ब्लैकआउट की स्थिति बन गई।

  • तुलना: यह अक्टूबर 2024 के बाद दर्ज किया गया अब तक का सबसे शक्तिशाली विस्फोट है।

कोरोनल मास इजेक्शन (CME): धरती की ओर बढ़ रहा प्लाज्मा का गुबार

सौर ज्वाला के साथ ही सूर्य से प्लाज्मा और चुंबकीय ऊर्जा का एक विशाल बादल निकला है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में कोरोनल मास इजेक्शन (CME) कहा जाता है।

वैज्ञानिकों की चेतावनी: हालांकि यह बादल सीधे तौर पर पृथ्वी से नहीं टकराएगा, लेकिन इसकी एक ‘हल्की टक्कर’ (Glancing Blow) की पूरी संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो 5 फरवरी के आसपास पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में हलचल बढ़ेगी।

‘सोलर मैक्सिमम’ का असर: शानदार ऑरोरा और तकनीकी चुनौतियां

सूर्य वर्तमान में अपने 11 साल के चक्र के सबसे सक्रिय चरण ‘सोलर मैक्सिमम’ में है, जो 2026 तक जारी रह सकता है। इस दौरान हमें दो तरह के प्रभाव देखने को मिल सकते हैं:

  1. सकारात्मक: आसमान में रंगीन और चमकदार नॉर्दर्न लाइट्स (ऑरोरा) देखने को मिल सकती हैं, जो सामान्य से कम अक्षांशों पर भी दिखाई दे सकती हैं।

  2. नकारात्मक: जीपीएस (GPS) नेविगेशन में गड़बड़ी, बिजली ग्रिड पर दबाव और सैटेलाइट्स के कामकाज में बाधा आने की आशंका है।

फिलहाल, स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर इस सनस्पॉट पर चौबीसों घंटे नजर रखे हुए है ताकि किसी भी बड़े भू-चुंबकीय तूफान (Geomagnetic Storm) की पूर्व चेतावनी दी जा सके।

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