रांची: भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM), रांची के 15वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में देश के उप-राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शामिल हुए। इस भव्य समारोह में उन्होंने उभरते हुए युवा लीडर्स को मेडल और सर्टिफिकेट प्रदान किए। कुल 558 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें पीएचडी से लेकर एमबीए और आईपीएम के छात्र शामिल थे।
बोर्ड-रूम से आगे बढ़कर समाज से जुड़ें: उप-राष्ट्रपति
अपने संबोधन में उप-राष्ट्रपति ने छात्रों को जीवन का एक बड़ा मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि “प्रबंधन की शिक्षा केवल बोर्ड-रूम और बैलेंस शीट तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का समाधान तभी संभव है जब आप समाज के साथ जुड़ेंगे।” उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को पूरा करने के लिए ‘ग्लोबल सोचें, लेकिन लोकल स्तर पर कार्य करें’। उन्होंने जोर देकर कहा कि शॉर्टकट के बजाय चरित्र और मुनाफे के बजाय उद्देश्य को चुनना ही एक सच्चे लीडर की पहचान है।
राज्यपाल और मंत्रियों ने सराहा संस्थान का योगदान
समारोह में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भी छात्रों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने संस्थान के ‘अटल बिहारी वाजपेयी सेंटर’ और ‘सेंटर फॉर ट्राइबल अफेयर्स’ की सराहना करते हुए कहा कि ये केंद्र समावेशी विकास में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने राज्य सरकार की ‘गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना’ का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे आईआईएम रांची के 24 छात्रों ने 3.21 करोड़ रुपये के ऋण का लाभ उठाया है। उन्होंने राज्य के हर कमिश्नरेट में पांच नए बिजनेस स्कूल खोलने की योजना में आईआईएम रांची से मार्गदर्शन की अपील भी की।
भगवान बिरसा मुंडा को नमन
दीक्षांत समारोह से पहले उप-राष्ट्रपति खूंटी जिले के उलिहातू गांव पहुँचे, जो भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली है। वहां उन्होंने श्रद्धासुमन अर्पित किए और ‘धरती आबा’ के वंशजों से बातचीत की। उन्होंने रांची के बिरसा चौक पर भी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।
समारोह में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश और केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। यह दिन छात्रों के लिए न केवल डिग्री हासिल करने का था, बल्कि राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका तय करने का संकल्प लेने का भी था।



