Washington, (US): खुद को मानवाधिकारों का सबसे बड़ा पैरोकार बताने वाले अमेरिका की पोल ‘एपस्टीन फाइल्स’ ने खोलकर रख दी है। एक हालिया ग्लोबल सर्वे के नतीजों ने साबित कर दिया है कि अमेरिकी न्याय प्रणाली अब केवल रईसों और शक्तिशाली लोगों की ‘सुरक्षा कवच’ बनकर रह गई है। सर्वे में शामिल 92 फीसदी लोगों ने माना कि यह मामला केवल एक अपराधी का नहीं, बल्कि पूरे अमेरिकी एलीट क्लास के नैतिक पतन का प्रमाण है।

अमीरों के लिए अलग और गरीबों के लिए अलग कानून

सर्वे के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। करीब 95.6% लोगों का मानना है कि अमेरिकी अदालतें शक्तिशाली लोगों के साथ नरमी और आम जनता के साथ सख्ती बरतती हैं। रसूखदारों के नाम बचाने के लिए कोर्ट में सालों तक फाइलों को सीलबंद रखा गया और जब उन्हें जारी किया गया, तो अहम जानकारियों पर काली स्याही फेर दी गई। 93.9% लोगों ने इसे ‘चयनात्मक पारदर्शिता’ (Selective Transparency) बताते हुए महज एक धोखा करार दिया है।

मानवाधिकारों की कूटनीति की निकली हवा

इस गंदे खेल में सबसे ज्यादा शिकार गरीब और नाबालिग लड़कियां हुईं, लेकिन सत्ता और पैसे की ताकत ने अपराधियों को बचाए रखा। 91.8% उत्तरदाताओं का कहना है कि एपस्टीन केस ने दूसरे देशों को मानवाधिकारों का पाठ पढ़ाने वाले अमेरिका की पोल खोल दी है। अब दुनिया मानती है कि अमेरिका में न्यायिक संरक्षण की उम्मीद करना बेकार है, क्योंकि वहां कानून रईसों की मुट्ठी में है।

सुधार के बजाय राजनीति का अखाड़ा

हैरानी की बात यह है कि अमेरिका अपनी कमियों को दूर करने के बजाय इसे राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टियां एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने में व्यस्त हैं, जबकि असली भ्रष्टाचार और बड़े नामों की जांच आज भी ठंडे बस्ते में है। महज 24 घंटे के भीतर 9,690 लोगों ने इस सर्वे में अपनी राय देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी मूल्यों से अब दुनिया का मोहभंग हो चुका है।

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