Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोपों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। जेल प्रशासन पर कैदियों से मुलाकात करवाने के नाम पर पैसे उगाही के गंभीर आरोप लगे थे। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद आठ जेलकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि जेल अधीक्षक और सहायक जेलर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

सूत्रों के अनुसार, जेल के अंदर लंबे समय से यह शिकायतें मिल रही थीं कि मुलाकात के लिए आने वाले परिजनों से जेलकर्मी रिश्वत लेकर कैदियों से मुलाकात करवाते हैं। इस पूरे प्रकरण को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया और जेल विभाग को पारदर्शिता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

जेल आईजी सुदर्शन मंडल ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई थी। टीम ने मामले की पूरी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसके आधार पर दोषी पाए गए कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई।

निलंबित जेलकर्मियों की सूची में चीफ हेड वार्डन अवधेश कुमार और रिजर्व हेड वार्डन विनोद कुमार शामिल हैं। इन पर मॉनिटरिंग में लापरवाही और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के आरोप हैं। इनके अलावा जेल क्लर्क प्रमिला कुमारी को कैदियों की चिट्ठियां रोकने और लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित किया गया है। निरल टोप्पो को मुलाकातियों से पैसे लेने के आरोप में सस्पेंड किया गया है।

इसके अलावा, संविदा पर कार्यरत दो पूर्व सैनिकों को भी तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। वहीं, भ्रष्टाचार में संलिप्तता और निगरानी में विफल रहने के कारण जेल अधीक्षक और सहायक जेलर को स्पष्टीकरण देने का नोटिस जारी किया गया है।

इस पूरे मामले में सबसे चर्चित नाम अवधेश सिंह का है, जिन्हें जेल आईजी ने निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

गौरतलब है कि इस भ्रष्टाचार के मामले पर झारखंड हाईकोर्ट ने भी स्वतः संज्ञान लिया था और सख्त रुख दिखाते हुए जांच के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट के निर्देश पर बनी जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में कई अनियमितताओं की पुष्टि की, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि जेल प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आगे भी नियमित निगरानी और आकस्मिक जांच जारी रहेगी।

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