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बंगाल में बड़ा खेल: आई-पैक कर्मियों पर चुनाव आयोग की टेढ़ी नजर, मची खलबली!

India News: पश्चिम बंगाल की चुनावी फिजां में एक नया विवाद गहरा गया है। चुनाव आयोग (ईसीआई) ने राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान आई-पैक के कर्मियों को कथित रूप से डेटा-एंट्री ऑपरेटर नियुक्त करने की शिकायतों पर कड़ा रुख अख्तियार

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India News: पश्चिम बंगाल की चुनावी फिजां में एक नया विवाद गहरा गया है। चुनाव आयोग (ईसीआई) ने राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान आई-पैक के कर्मियों को कथित रूप से डेटा-एंट्री ऑपरेटर नियुक्त करने की शिकायतों पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। आरोप बेहद संगीन हैं—कहा जा रहा है कि इन निजी संस्था के लोगों को कागजों पर अनुबंधित राज्य सरकारी कर्मचारी दिखाकर सिस्टम में घुसाया गया। यह सारा बवाल तब और बढ़ गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोलकाता में आई-पैक के दफ्तर और इसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के ठिकाने पर छापेमारी की।

पुलिस वेरिफिकेशन और बैकग्राउंड की होगी दोबारा स्कैंनिंग

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक, आयोग ने अब उन सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के बैकग्राउंड की दोबारा जांच करने का आदेश दिया है जिन्हें डेटा-एंट्री का जिम्मा मिला है। चुनाव आयोग के कड़े नियमों के तहत, ऐसे किसी भी काम के लिए पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य है। अब इसी रिपोर्ट की बारीकी से दोबारा पड़ताल की जा रही है ताकि किसी भी बाहरी प्रभाव को रोका जा सके। आयोग इस मामले को इसलिए गंभीरता से ले रहा है क्योंकि मतदाता सूची बनाने की प्रक्रिया में इन ऑपरेटरों की भूमिका रीढ़ की हड्डी की तरह होती है।

अंतिम मतदाता सूची और गड़बड़ियों का बड़ा डर

इन डेटा-एंट्री ऑपरेटरों का असली काम बूथ-लेवल अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा फील्ड से जुटाए गए डेटा को कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज करना है। ईआरओ और एईआरओ को सौंपे गए इन फॉर्म्स में अगर जरा सी भी हेरफेर हुई, तो फाइनल वोटर लिस्ट का पूरा गणित बिगड़ सकता है। पहले भी ऐसी शिकायतें आई थीं कि गलत एंट्री की वजह से मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग परेशान हुआ था। अब जबकि 16 दिसंबर 2025 को ड्राफ्ट लिस्ट आ चुकी है और 14 फरवरी को फाइनल लिस्ट आनी है, आयोग कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। इसके तुरंत बाद बंगाल विधानसभा चुनाव के बिगुल बजने की उम्मीद है।

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