India News: देश में बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर Supreme Court of India ने कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि कुत्ते के काटने से घायल या मृत व्यक्ति को राज्य सरकारों को मुआवजा देना होगा। अदालत का मानना है कि यह मामला केवल पशु प्रेम का नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा है।

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खाना खिलाने वालों की भी जिम्मेदारी

जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाने वाले लोग भी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। अदालत ने कहा कि अगर लोग कुत्तों से इतना लगाव रखते हैं तो उन्हें अपने घर में रखें, सड़कों पर छोड़ने से वे लोगों को काटते और डराते हैं।

भावनाओं से ऊपर नागरिकों की सुरक्षा

वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी द्वारा आवारा कुत्तों के मुद्दे को भावनात्मक रूप से रखने पर अदालत ने साफ कहा कि भावनाएं केवल जानवरों के लिए नहीं, बल्कि इंसानों की जान और सुरक्षा के लिए भी होनी चाहिए। अदालत ने संतुलन बनाए रखने की बात कही।

पहले भी दिए जा चुके हैं निर्देश

गौरतलब है कि इससे पहले 7 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था। हाल के महीनों में कुत्तों के हमलों में बच्चों और बुजुर्गों की मौत की घटनाओं ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है।

राज्यों पर अब कार्रवाई का दबाव

अदालत के इस फैसले के बाद अब राज्य सरकारों पर तत्काल ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है। इसे जन सुरक्षा के लिहाज़ से एक बड़ा और जरूरी फैसला माना जा रहा है।

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