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दीपावली पर मां कामाक्षी की अनोखी परंपरा, घर-घर जाकर भक्तों को देती हैं दर्शन

India News: देशभर के मंदिर अपनी मान्यताओं और परंपराओं के लिए पहचाने जाते हैं, लेकिन कांचीपुरम का श्री कांची कामाक्षी अम्मन शक्तिपीठ मंदिर दीपावली पर होने वाले विशेष आयोजन के लिए खास प्रसिद्ध है। यहां मान्यता है कि जिनके माता-पिता में से किसी का भी

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India News: देशभर के मंदिर अपनी मान्यताओं और परंपराओं के लिए पहचाने जाते हैं, लेकिन कांचीपुरम का श्री कांची कामाक्षी अम्मन शक्तिपीठ मंदिर दीपावली पर होने वाले विशेष आयोजन के लिए खास प्रसिद्ध है। यहां मान्यता है कि जिनके माता-पिता में से किसी का भी निधन हुआ हो, वे मृत्यु के एक साल तक मां के दर्शन नहीं कर सकते।

मंदिर की परंपरा के अनुसार, दीपावली पर स्वयं मां कामाक्षी भक्तों के घर-घर जाकर उन्हें आशीर्वाद देती हैं। इस दिन मंदिर में मां की भव्य पालकी यात्रा निकाली जाती है। भक्त अपने घरों के बाहर खड़े होकर मां को प्रणाम करते हैं और आशीर्वाद लेते हैं।

मां कामाक्षी का दिव्य रूप

श्री कांची कामाक्षी अम्मन मंदिर शक्तिपीठ है, जहां एक ही प्रतिमा में मां लक्ष्मी और मां सरस्वती दोनों विराजमान हैं। माना जाता है कि मां कामाक्षी की एक आंख में लक्ष्मी और दूसरी में सरस्वती हैं। भक्त अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए मां के चरणों में सिंदूर अर्पित करते हैं, यहां सिर्फ सिंदूर ही मां को चढ़ाना परंपरा है।

मंदिर की पौराणिक कथा के अनुसार, मां लक्ष्मी ने कभी मां कामाक्षी की पूजा की थी। भगवान विष्णु के शाप से कुरूप रूप में आई मां लक्ष्मी को मां कामाक्षी ने सुंदरता प्रदान की, जिसके बाद मां लक्ष्मी भी यहीं विराजमान हो गईं।

मां का बालिका स्वरूप

इस मंदिर में मां कामाक्षी आठ साल की बालिका के रूप में विराजती हैं और उनकी पूजा सिर्फ विवाहित पंडित ही कर सकते हैं। इसे मां के सबसे पवित्र स्वरूप के रूप में माना जाता है। दीपावली पर मंदिर को फूलों और स्वर्ण आभूषणों से सजाया जाता है, साथ ही दक्षिण भारतीय संगीत के साथ मां की आराधना होती है।

भक्त पूरे देश से इस अद्वितीय परंपरा को देखने और मां के दर्शन के लिए कांचीपुरम पहुंचते हैं।

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