चैनपुर में सोमवार को समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रखंड स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अनुमंडल पुस्तकालय परिसर में आयोजित हुआ, जिसमें दिव्यांग बच्चों के सर्वांगीण विकास और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यशाला का उद्घाटन जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा, सीडीपीओ सुपरवाइजर अंजली वर्मा और प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को समाज में समान अवसर और सम्मानजनक जीवन दिलाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पोषक क्षेत्र में रहने वाले दिव्यांग बच्चों की पहचान कर उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना था। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को दिव्यांग बच्चों के मनोविज्ञान, उनकी जरूरतों और आधुनिक शिक्षण तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
इस कार्यक्रम में कुल 193 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, आंगनबाड़ी सेविकाएं और अभिभावक शामिल थे। वक्ताओं ने कहा कि दिव्यांगता किसी भी बच्चे की क्षमता को सीमित नहीं करती, बल्कि उचित मार्गदर्शन और सहयोग से वे भी समाज में अपनी पहचान बना सकते हैं।
समावेशी शिक्षा का उद्देश्य सभी बच्चों को बिना किसी भेदभाव के एक ही मंच पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है, जिससे हर बच्चा खुद को समाज का अभिन्न हिस्सा महसूस कर सके।



