Dhanbad: जिले के बोरागढ़ और धर्माबंध इलाके से कोयला तस्करी की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने शासन और प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि यहां माफियाओं का हौसला इतना बढ़ गया है कि उन्होंने कोयले की लोडिंग को आसान बनाने के लिए नदी के प्राकृतिक मार्ग (नदी की धारा) तक को बदल दिया है। यह न सिर्फ खनिज की चोरी है, बल्कि पर्यावरण के साथ किया जा रहा एक खिलवाड़ भी है।
रात के अंधेरे में ट्रकों का काफिला
ग्रामीणों का दावा है कि हर दिन सूर्यास्त के बाद नदी किनारे का नजारा बदल जाता है। अवैध रूप से खनन किया गया कोयला ट्रकों में लोड किया जाता है और फिर सुरक्षित रास्तों से इसे बिहार भेज दिया जाता है। स्थानीय लोगों की मानें तो प्रतिदिन कम से कम दो बड़े ट्रक इस अवैध कारोबार का हिस्सा बन रहे हैं। ताज्जुब की बात यह है कि जिस इलाके में परिंदा भी पर नहीं मार सकता, वहां इतनी बड़ी मशीनी आवाजाही पर CISF और स्थानीय पुलिस ने चुप्पी साध रखी है।
‘पिंटू’ का सिंडिकेट और ‘ऊपर’ तक पहुंच
तस्करी के इस पूरे मकड़जाल के पीछे ‘पिंटू’ नाम के एक युवक का नाम प्रमुखता से उभर कर आ रहा है। चर्चा है कि इस युवक की पहुंच सत्ता और रसूख के गलियारों में इतनी गहरी है कि वर्दीधारी भी उस पर हाथ डालने से कतराते हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी किसी नाम की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इलाके का बच्चा-बच्चा इस नाम से वाकिफ है।
पर्यावरण और सुरक्षा एजेंसियां सवालों के घेरे में
कोयला क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए तैनात CISF और स्थानीय थाना पुलिस की भूमिका पर अब सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस नेटवर्क को नहीं तोड़ा गया, तो यह संगठित अपराध का रूप ले लेगा। फिलहाल, पूरे इलाके में डर और असुरक्षा का माहौल है और ग्रामीण निष्पक्ष जांच की आस लगाए बैठे हैं।
इस खबर को भी पढ़ें :



