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रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने वर्ष 2020 में लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र में पुलिस की पीसीआर (PCR) वैन पर हुए भीषण नक्सली हमले के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में लंबे समय से जेल में बंद दो आरोपितों फगुना गंझू और सुनील गंझू को सशर्त जमानत दे दी है। इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में संपन्न हुई।
खंडपीठ ने दोनों आरोपितों की ओर से दायर जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें राहत दी है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, फगुना और सुनील गंझू पर प्रतिबंधित नक्सली संगठन के लिए ‘ओवर ग्राउंड वर्कर’ के तौर पर काम करने का आरोप था। उन पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने लुकिया मोड़ पर हुए घातक हमले के दौरान नक्सलियों की सीधे तौर पर मदद की थी और उन्हें रसद व गुप्त सूचनाएं पहुंचाई थीं। इस आरोप में वे साल 2020 से ही न्यायिक हिरासत के तहत जेल की सलाखों के पीछे बंद थे।
अदालत ने क्यों दी जमानत?
सुनवाई के दौरान आरोपितों के कानूनी पक्ष ने अदालत के समक्ष यह दलील रखी कि दोनों आरोपित पिछले लगभग छह वर्षों से जेल में बंद हैं। इसके बावजूद, इस मामले में चल रहे मुकदमे का निष्पादन (Trial) अब तक पूरा नहीं हो सका है। खंडपीठ ने इस बात को गंभीरता से लिया कि आरोपित लंबी अवधि से कारावास काट रहे हैं। इसी लंबी हिरासत अवधि और केस से जुड़े अन्य न्यायिक तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने उन्हें जमानत का लाभ देना उचित समझा।
इस सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरव कुमार ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। एनआईए ने दलील दी कि दोनों आरोपितों का संबंध सीधे तौर पर देश विरोधी नक्सली नेटवर्क से है और वे सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने में शामिल रहे हैं। हालांकि, अदालत ने एनआईए के विरोध के विपरीत हिरासत की लंबी अवधि को प्राथमिकता देते हुए दोनों की जमानत मंजूर कर ली।
उल्लेखनीय है कि 13 जून 2020 को लातेहार के लुकिया मोड़ पर नक्सलियों ने पुलिस की गाड़ी पर घात लगाकर अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिसमें चार जवान शहीद हो गए थे। बाद में देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी एनआईए ने इसकी कमान संभाली थी। इस मामले में कुल चार गिरफ्तारियां हुई थीं और पूर्व में दो अन्य आरोपितों बैजनाथ और राजेश को पहले ही हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी थी। फगुना और सुनील की रिहाई के आदेश के साथ ही अब इस मामले के सभी चारों आरोपितों को अदालत से बेल मिल चुकी है।

