Ranchi : झारखंड के कोडरमा जिले में वर्षों से लंबित तिलैया नहर योजना को लेकर अब नयी उम्मीदें जगने लगी हैं। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन गुरुवार को जल संसाधन मंत्री हफीजुल हसन ने सदन को जानकारी दी कि इस योजना के लिए डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) यूडीपीएल के तहत तैयार की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सरकार अंडरग्राउंड पाइपलाइन के जरिए इलाके के लोगों तक पानी पहुंचाने की तैयारी में है, जिससे भूमि अधिग्रहण की जटिल प्रक्रिया और ग्रामीणों की आपत्ति से बचा जा सकेगा।

मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि ग्रामीण अपनी जमीन का अधिग्रहण योजनाओं के लिए देने में अनिच्छुक रहते हैं, ऐसे में अंडरग्राउंड पाइपलाइन सबसे उपयुक्त विकल्प साबित होगा। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि 1948 में जब दामोदर वैली कॉरपोरेशन (डीवीसी) का गठन हुआ, तब उसे विशाल अधिकार प्राप्त हुए। तिलैया डैम वर्ष 1953 में बना था और उस समय के समझौते के तहत 246 एमटीएम जल का उपयोग करने का अधिकार झारखंड को दिया गया था।

इस मुद्दे को भाजपा विधायक अमित कुमार यादव ने अल्पसूचित प्रश्न के तहत उठाया। विधायक ने कहा कि तिलैया नहर योजना पर काम 1950 से ही विचाराधीन है। वर्ष 2014-15 में इस परियोजना का डीपीआर बनाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन आज तक यह तैयार नहीं हो सका। उन्होंने इस देरी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि डीवीसी के ज्यादातर डैम झारखंड में बने हैं, फिर भी झारखंड के किसान उनसे सिंचाई का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। इसके विपरीत, पश्चिम बंगाल इन जल संसाधनों का उपयोग कर रहा है, जो झारखंड के किसानों के लिए अन्यायपूर्ण है।

अमित कुमार यादव ने सरकार से मांग की कि तिलैया नहर योजना को शीघ्र पूर्ण किया जाए और डीपीआर निर्माण में तेजी लाई जाए, ताकि किसानों की सिंचाई समस्या दूर हो सके। इस पर मंत्री हफीजुल हसन ने आश्वासन दिया कि सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम कर रही है और अंडरग्राउंड पाइपलाइन तकनीक अपनाकर योजना को आगे बढ़ाया जाएगा।

तिलैया नहर परियोजना पूरी होने से कोडरमा और आसपास के क्षेत्रों की कृषि को बड़ी राहत मिलेगी। इसके साथ ही किसानों को लंबे समय से चली आ रही सिंचाई समस्या से भी निजात मिलेगी। सरकार की नई पहल से इस ऐतिहासिक परियोजना को जमीन पर उतरने की उम्मीद बढ़ गई है।

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