रांची: जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने शुक्रवार शाम समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) स्थित विभिन्न कार्यालयों का औचक निरीक्षण कर प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया। शाम 04:35 बजे शुरू हुए इस औचक दौरे में उपायुक्त ने न केवल फाइलों और हाजिरी रजिस्टर की जांच की, बल्कि कार्यालय की कार्यसंस्कृति को लेकर कड़े निर्देश भी जारी किए।

अनुशासन पर कड़ा प्रहार

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने हर डेस्क पर नेम प्लेट और हर कर्मी के गले में पहचान पत्र होना अनिवार्य बताया। पंचायती राज कार्यालय में एक लिपिक को बिना आईडेंटिटी कार्ड के कार्य करते देख उन्होंने तत्काल ‘शोकॉज’ (कारण बताओ नोटिस) जारी करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यालय में आने वाली जनता को पता होना चाहिए कि वे किससे बात कर रहे हैं। साथ ही, अनुकंपा पर नियुक्त कर्मियों को बेहतर कार्य प्रशिक्षण देने पर जोर दिया।

सुरक्षा और संवेदनशीलता

उपायुक्त ने समाहरणालय भवन की छत से लेकर ग्राउंड फ्लोर तक का जायजा लिया। उन्होंने अग्निशामक यंत्रों (Fire Extinguishers) की कार्यक्षमता और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान ही उन्होंने एक व्यक्ति से कुष्ठ पीड़ित समाज की पानी की समस्या सुनी। संवेदनशील रुख अपनाते हुए डीसी ने तुरंत निर्मल आवास परिसर में बोरिंग कराने का आदेश दिया। इस निरीक्षण के दौरान अपर जिला दंडाधिकारी राजेश्वरनाथ आलोक और नजारत उपसमाहर्त्ता सुदेश कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

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