रांची: झारखंड सहित देश भर में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत काम करने वाले लाखों मजदूरों के हाथ शुक्रवार को रुक गए। अपनी लंबित मांगों और केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में सैकड़ों मनरेगा मजदूरों ने राज्य भर में अपने-अपने कार्यस्थलों पर काम ठप कर राष्ट्रव्यापी हड़ताल का बिगुल फूंक दिया। राजधानी रांची के मेन रोड में जेकेजीएमयू, जेआरकेएस और सीटू (CITU) सहित कई प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने सड़क पर उतरकर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

इस बड़े आंदोलन का आयोजन संयुक्त रूप से ‘कृषि और ग्रामीण मजदूर यूनियनों के संयुक्त मंच’ और ‘नरेगा संघर्ष मोर्चा’ की ओर से किया गया था। इस हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा ने भी अपना पूरा समर्थन दिया है।

नेताओं ने बताया कि यह हड़ताल 12 फरवरी 2026 को आयोजित अखिल भारतीय आम हड़ताल के दौरान उठाई गई मांगों को लेकर चल रहे संघर्ष का ही अगला चरण है। संयुक्त मंच ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश की एकमात्र कानूनी रूप से गारंटीकृत रोजगार योजना (मनरेगा) को व्यवस्थित रूप से कमजोर करने की कोशिश कर रही है, जो बेहद निंदनीय है।

मजदूरों की चार बुनियादी मांगें, जिन पर अड़ा है मोर्चा

इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल के जरिए ग्रामीण रोजगार को बचाने के लिए मुख्य रूप से चार बड़ी मांगें सरकार के सामने रखी गई हैं:

  • मजबूत ढांचा और अधिकार: वीबी-जी राम-जी अधिनियम को तुरंत निरस्त कर एक कानूनी रूप से मजबूत मनरेगा ढांचे को दोबारा बहाल किया जाए।

  • 200 दिन काम और 700 रुपये दिहाड़ी: आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर ग्रामीण परिवार को साल में कम से कम 200 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाए। साथ ही, महंगाई सूचकांक के आधार पर साल में दो बार संशोधित होने वाली न्यूनतम दैनिक मजदूरी को बढ़ाकर 700 रुपये किया जाए।

  • डिजिटल और चेहरा पहचानने वाली हाजिरी का विरोध: मजदूरों ने तकनीकी जटिलताओं के नाम पर परेशान करने वाली डिजिटल उपस्थिति, पहचान-लिंक्ड भुगतान प्रणालियों और हाल ही में लागू की गई चेहरा पहचानने वाली (फेसियल रिकग्निशन) उपस्थिति प्रणाली पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।

  • ग्राम सभाओं को मिले असली ताकत: स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए ग्राम सभाओं को मनरेगा कार्यों के नियोजन, क्रियान्वयन और सोशल ऑडिट की मुख्य जिम्मेदारी सौंपकर उन्हें पूरी तरह से सशक्त बनाया जाए।

मेहनतकश जनता से एकजुट होने की अपील

इस आंदोलन के समर्थन में झारखंड खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन, झारखंड राज्य किसान सभा और सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (CITU) की राज्य कमेटियों ने एक साझा बयान जारी किया है। उन्होंने राज्य की समस्त मेहनतकश जनता और आम नागरिकों से अपील की है कि वे ग्रामीण मजदूरों के रोजगार और सम्मान की इस लड़ाई में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हों, ताकि कॉरपोरेट परस्त नीतियों के खिलाफ इस संघर्ष को मुकाम तक पहुंचाया जा सके।

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