Ranchi: राजधानी रांची के कांके स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) में कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आदिवासी मूलवासी संघर्ष समिति, कांके की संयोजक समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को विश्वविद्यालय के डीन डेवलपमेंट मनोज कुमार वर्मा से मुलाकात कर विभिन्न गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
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स्थानीय संवेदकों की अनदेखी और कमीशनखोरी का आरोप
प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि परिसर में चल रहे विकास और निर्माण कार्यों में स्थानीय संवेदकों और वेंडरों की जानबूझकर अनदेखी की जा रही है, जबकि बाहरी ठेकेदारों को अनुचित प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ ही विभिन्न निर्माण योजनाओं में भारी कमीशनखोरी, घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग और तय मानकों की अनदेखी करते हुए गुणवत्ताविहीन कार्य कराने का गंभीर मामला भी उठाया गया।
चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की नियुक्ति में धांधली का दावा
संगठन के सदस्यों ने विश्वविद्यालय में चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया में भी स्थानीय युवाओं की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संबंधित आउटसोर्सिंग और विभागीय एजेंसी द्वारा कथित रूप से मोटी रकम वसूलकर बाहरी लोगों को बहाल किए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। समाचार माध्यमों में इन मामलों के उजागर होने के बाद संगठन ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष विभागीय जांच कराने की मांग की है, ताकि दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
डीन डेवलपमेंट ने दिया निष्पक्ष जांच का आश्वासन
मुलाकात के दौरान डीन डेवलपमेंट मनोज कुमार वर्मा ने प्रतिनिधिमंडल की सभी बातों को गंभीरता से सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि ज्ञापन में उठाए गए सभी बिंदुओं की विभागीय स्तर पर पारदर्शी जांच कराई जाएगी और जो भी अधिकारी या एजेंसी दोषी पाई जाएगी, उसके खिलाफ नियमों के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इस प्रतिनिधिमंडल में समिति के संयोजक हरिनाथ साहू, रंजीत टोप्पो, सज्जाद अंसारी, अभिषेक राज हेरेंज, अजीज अंसारी, दीपक दास, वनिता मेहता, कंचन रानी, सुमित्रा टोप्पो, राज किशोर रवि, अब्बू रेहान और मजीद आलम मुख्य रूप से शामिल थे।




