World News: सिलिकॉन वैली, जिसे दुनिया तकनीक और नवाचार के केंद्र के रूप में जानती है, इन दिनों एक बेहद खतरनाक और अनधिकृत प्रयोग की प्रयोगशाला बन गई है। यहां काम करने वाले प्रतिभाशाली युवा अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने और वजन घटाने की होड़ में ‘चीनी पेप्टाइड्स’ के मकड़जाल में उलझते जा रहे हैं। यह कोई आम दवा नहीं, बल्कि सीधे चीन से मंगाया जा रहा एक ऐसा ‘सफेद पाउडर’ है, जिसकी न तो कोई मेडिकल गारंटी है और न ही सरकार से मंजूरी।
ऑफिस से लेकर प्राइवेट पार्टियों तक ‘पेप्टाइड रेव’ का क्रेज
हैरानी की बात यह है कि इन रसायनों का प्रचार अब छिपकर नहीं, बल्कि स्टार्टअप ऑफिसों और ‘पेप्टाइड रेव’ जैसे आयोजनों में खुलेआम हो रहा है। टेक प्रोफेशनल इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा मान रहे हैं। आंकड़ों की मानें तो साल 2025 के शुरुआती नौ महीनों में ही चीन से इन रसायनों का आयात आठ गुना तक बढ़ गया है। लोग ऑनलाइन साइट्स से इंसुलिन सिरिंज मंगवाते हैं और खुद ही अपनी नसों में इसे इंजेक्ट कर रहे हैं।
“क्या चंद घंटों का फोकस आपकी जिंदगी से ज्यादा कीमती है?”
डॉक्टर नहीं, टिकटॉक बन रहा है गाइड
सिलिकॉन वैली के गलियारों में एक सप्लायर ने बताया कि यह ट्रेंड ‘क्लस्टर’ में फैलता है। अगर ऑफिस का एक बड़ा बॉस या प्रभावशाली कर्मचारी इसे इस्तेमाल करता है, तो पूरी टीम इसे सुरक्षित मानकर अपना लेती है। ओजेम्पिक और वीगोवी जैसी स्वीकृत दवाओं की आड़ में अब बीपीसी-157, टीबी-500 और रेटाटूटाइड जैसे खतरनाक अनप्रूव्ड पेप्टाइड्स का इस्तेमाल हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे टिकटॉक और इंस्टाग्राम पर इसके ‘डू-इट-योरसेल्फ’ (DIY) वीडियो की बाढ़ आ गई है, जो युवाओं को गुमराह कर रही है।
कानून की आंखों में धूल झोंक रहा है ‘रिसर्च केमिकल’ का लेबल
कार्रवाई से बचने के लिए इन रसायनों को ‘केवल शोध के लिए’ (For Research Purpose Only) बताकर बेचा जा रहा है। कंपनियां दावा करती हैं कि ये इंसानों के लिए नहीं हैं, लेकिन कमेंट सेक्शन और यूजर रिव्यू की हकीकत कुछ और ही बयां करती है। नींद, एंटी-एजिंग और सुपर-फोकस के लालच में अमेरिकी युवा एक ऐसे अंधे कुएं में कूद रहे हैं, जहां से वापसी का रास्ता फिलहाल किसी के पास नहीं है।



