World News: दोस्तों, युद्ध का मैदान अब बदलने वाला है। वह दौर गया जब सिर्फ तोपों के गोलों और मिसाइलों से जीत हासिल होती थी। आज के दौर में सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुके हैं ‘ड्रोन झुंड’—यानी एक साथ हमला करने वाले सैकड़ों छोटे और घातक ड्रोन। इनसे निपटने के लिए चीन ने एक ऐसा ‘जादुई’ हथियार बनाया है, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया के सैन्य गलियारों में हो रही है। इस हथियार का नाम है ‘हरिकेन 3000’।
क्या है हरिकेन 3000 और यह कैसे काम करता है?
चीनी सरकारी रक्षा कंपनी नोरिन्को द्वारा विकसित यह सिस्टम कोई साधारण मिसाइल यूनिट नहीं है। यह एक हाई-पावर माइक्रोवेव (HPM) हथियार है। आसान भाषा में कहें तो, यह ट्रक पर लगा एक ऐसा विशालकाय यंत्र है जो अदृश्य तरंगें छोड़ता है। जब दुश्मन के ड्रोन का झुंड इसकी रेंज में आता है, तो ये माइक्रोवेव किरणें उनके नाजुक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और कंट्रोल सिस्टम को झुलसा देती हैं। परिणाम? ड्रोन बिना किसी धमाके के सीधे जमीन पर आ गिरते हैं।
बिना बारूद के लगातार हमला करने की ताकत
इस हथियार की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें बारूद खत्म होने का डर नहीं है। जब तक ट्रक में बिजली की सप्लाई (जेनरेटर या बैटरी के जरिए) बनी रहेगी, यह लगातार हमला करता रहेगा। जहाँ एक मिसाइल की कीमत करोड़ों में होती है, वहीं हरिकेन 3000 से हमला करना बेहद सस्ता है।
“विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का ‘लियोनिडास’ सिस्टम सिर्फ 2 किमी तक काम करता है, जबकि चीन का यह हरिकेन 3 किमी दूर बैठे दुश्मन को भी राख कर सकता है।”
सटीक रडार और भविष्य का युद्ध कौशल
हरिकेन 3000 का पहला जलवा दुनिया ने 2024 के झुहाई एयर शो में देखा था। इसमें लगे अत्याधुनिक रडार उड़ती हुई छोटी से छोटी चीज को पकड़ लेते हैं और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर उसे लॉक कर देते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में न तो कोई मलबा फैलता है और न ही आसपास के नागरिकों को कोई नुकसान होता है।
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यह हथियार इस बात का सबूत है कि आने वाले समय में जंग की दिशा बदल जाएगी। अब सैनिक जमीन पर टकराने के बजाय तरंगों और इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल से एक-दूसरे को मात देंगे। चीन का यह दावा अगर युद्धक्षेत्र में सच साबित हुआ, तो ड्रोन बनाने वाली ताकतों के लिए यह सबसे बड़ा ‘चेकमेट’ होगा।



