Beijing (China): दुनिया अब उस दौर में प्रवेश कर चुकी है जहां युद्ध के मैदान में सैनिकों की संख्या से ज्यादा मशीनों का दिमाग मायने रखेगा। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संचालित ‘ड्रोन स्वार्म’ यानी ड्रोनों के संगठित झुंड की तकनीक में एक बड़ी बढ़त हासिल कर ली है। नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी के ताजा परीक्षणों ने रक्षा विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि अब महज एक सैनिक बैठकर 200 से ज्यादा ड्रोनों के झुंड को एक साथ कमांड दे सकता है।
कैसे काम करता है यह मशीनी झुंड?
यह तकनीक मधुमक्खियों के झुंड की तरह काम करती है। सीसीटीवी (CCTV) की रिपोर्ट के अनुसार, ये ड्रोन ‘स्वायत्त एल्गोरिदम’ पर आधारित हैं। इसका मतलब है कि उड़ान भरते ही ये ड्रोन आपस में बात (कम्युनिकेशन) करने लगते हैं। झुंड के अंदर ही यह तय हो जाता है कि कौन सा ड्रोन जासूसी करेगा, कौन दुश्मन के रडार को भटकाने के लिए जाल (Decoy) बनेगा और कौन सा मुख्य हथियार बनकर हमला करेगा।
पारंपरिक रडार भी होंगे नाकाम
इस तकनीक की सबसे घातक बात यह है कि इसे रोकना मौजूदा मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए लगभग नामुमकिन है। जब सैकड़ों छोटे ड्रोन एक साथ आसमान में उभरते हैं, तो दुश्मन का रडार भ्रमित हो जाता है। इसके अलावा, इनमें ‘एंटी-जामिंग’ क्षमता है, यानी दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल्स का इन पर असर नहीं होता। यदि युद्ध के दौरान ऑपरेटर से इनका संपर्क टूट भी जाए, तो भी ये एआई की मदद से अपना मिशन खुद पूरा कर सकते हैं।
भारत के लिए बड़ी चुनौती
सैन्य संतुलन के लिहाज से चीन की यह उपलब्धि भारत और अन्य पड़ोसी देशों के लिए एक बड़ा अलार्म है। हालांकि भारतीय सेना भी स्वार्म ड्रोन तकनीक पर तेजी से काम कर रही है और इसके कई प्रदर्शन भी किए गए हैं, लेकिन एक साथ 200 ड्रोनों को नियंत्रित करने की चीन की यह क्षमता युद्ध की रणनीति को पूरी तरह बदल सकती है। अब जंग जमीन पर लड़ने के बजाय डेटा लिंक, एल्गोरिदम और एआई की सटीकता पर निर्भर हो गई है। आने वाले समय में मशीनों का यही तालमेल हार और जीत का फैसला करेगा।
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