Beijing, (China) — चीन के वैज्ञानिकों ने समय को मुट्ठी में करने की दिशा में एक ऐसी कामयाबी हासिल की है, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। दावा किया जा रहा है कि उन्होंने दुनिया की सबसे सटीक ‘ऑप्टिकल घड़ियों’ में से एक का निर्माण किया है। इस घड़ी की सटीकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अगले 30 अरब वर्षों तक चलने के बाद भी इसमें महज एक सेकंड का अंतर या त्रुटि आने की आशंका है। यह उपलब्धि भविष्य में समय की अंतरराष्ट्रीय मानक इकाई ‘सेकंड’ को फिर से परिभाषित करने का आधार बन सकती है।

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तकनीकी रूप से समझें तो यह अत्याधुनिक घड़ी परमाणुओं के भीतर मौजूद इलेक्ट्रॉनों के ऊर्जा स्तर में होने वाले बदलावों से निकलने वाले प्रकाश की आवृत्ति (Frequency) को मापती है। इसे ‘ऑप्टिकल परमाणु घड़ी’ कहा जाता है, जिसे वर्तमान में समय गणना की सबसे उन्नत और सटीक प्रणाली माना जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इतनी सूक्ष्म गणना वाली घड़ी से हमारे दैनिक जीवन से जुड़ी कई तकनीकों, जैसे सैटेलाइट नेविगेशन (GPS), टेलीकॉम नेटवर्क और जटिल वैज्ञानिक रिसर्च में क्रांतिकारी सुधार देखने को मिलेंगे।

कुदरत के रहस्यों से उठेगा पर्दा

यह तकनीक केवल दीवार पर टंगने या समय बताने तक सीमित नहीं है। इसकी मदद से पृथ्वी की सतह में होने वाले बेहद मामूली बदलावों और गुरुत्वाकर्षण (Gravity) की सूक्ष्म लहरों का भी अध्ययन किया जा सकेगा। यहां तक कि ज्वालामुखी फटने की आहट और पृथ्वी के भीतर होने वाली हलचलों को भी यह घड़ी पहले ही भांप सकेगी।

वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि यदि दुनिया के अलग-अलग कोनों में ऐसी कम से कम तीन घड़ियां एक साथ तालमेल बिठाकर काम करने लगें, तो ‘सेकंड’ की पुरानी परिभाषा को हमेशा के लिए बदलकर एक नया वैश्विक मानक स्थापित किया जा सकता है। यह खोज न केवल भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग है, बल्कि भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं और डीप-स्पेस कम्युनिकेशन के लिए भी नए रास्ते खोलने वाली साबित होगी।

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