Lohardaga: बाल श्रम उन्मूलन को लेकर केंद्र और राज्य सरकार लगातार अभियान चला रही हैं तथा नाबालिगों से मजदूरी कराने वालों के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधान भी लागू हैं। इसके बावजूद लोहरदगा जिले के पेशरार रोड स्थित लवपानी मुख्य गेट के नीचे उत्तरी पश्चिमी छोर निर्माणाधीन बंजारी डैम में नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराए जाने का मामला सामने आने के बाद विभागीय निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

श्रम विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार वन विभाग के अधीन निर्माणाधीन बंजारी डैम में कई नाबालिग युवक-युवतियां मजदूरी करते देखे गए हैं। आरोप है कि यह कार्य संबंधित अधिकारियों की जानकारी और मौजूदगी में कराया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण स्थल पर प्रभारी फॉरेस्टर विक्की कुमार मेहता नियमित रूप से मौजूद रहते हैं, बावजूद इसके नाबालिग बच्चों से काम लिए जाने का सिलसिला जारी है। ग्रामीणों ने बताया कि मामले की शिकायत पूर्व में भी संबंधित लोगों तक पहुंचाई गई थी, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। शिकायत के बाद भी बच्चों के कार्य करने का सिलसिला जारी रहने से ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यह बाल श्रम निषेध कानून की खुली अवहेलना है।

जांच और कार्रवाई की मांग तेज

बगरू क्षेत्र के ग्रामीणों की शिकायत पर जब निर्माण स्थल की पड़ताल की गई तो वहां कुछ ऐसे बच्चे भी कार्य करते पाए गए जिनकी उम्र बालिग होने पर सवाल खड़े होते हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इनमें से कई बच्चे स्थानीय विद्यालयों में कक्षा नौवीं के छात्र हैं और पढ़ाई के साथ-साथ मजदूरी कर रहे हैं।

घने जंगलों में चल रहे निर्माण कार्य

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि श्रम विभाग समय-समय पर ईंट-भट्ठों, होटलों, दुकानों और निजी प्रतिष्ठानों में छापेमारी कर बाल मजदूरी के मामलों की जांच करता है, लेकिन घने जंगलों के बीच संचालित सरकारी निर्माण कार्यों में भी ऐसी जांच उतनी ही आवश्यक है। उनका आरोप है कि सूदूरवर्ती जंगल क्षेत्रों में निगरानी की कमी का फायदा उठाकर नाबालिगों से काम कराया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि किसी निजी संस्था में बाल मजदूरी पाए जाने पर कार्रवाई की जा सकती है तो सरकारी विभागों के अधीन चल रहे निर्माण कार्यों में भी समान रूप से जवाबदेही तय होनी चाहिए। ऐसे मामलों में श्रम विभाग को स्वतः संज्ञान लेकर जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

इस संबंध में जब प्रभारी फॉरेस्टर विक्की कुमार मेहता से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ये लोग खुद काम करने आ जाते हैं, इसलिए उन्हें काम करने देते हैं। हम उन्हें वहां से भगाते नहीं हैं। वहीं मामले पर लोहरदगा के डीएफओ अभिषेक कुमार ने कहा कि वे संबंधित प्रभारी फॉरेस्टर से बात करेंगे और पूरे मामले की जांच कराएंगे। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, निर्माण स्थल पर नाबालिगों से कराए जा रहे कार्य पर तत्काल रोक, श्रम विभाग द्वारा स्वतंत्र जांच तथा दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि वन विभाग और श्रम विभाग इस गंभीर आरोप को कितनी गंभीरता से लेते हैं और जांच के बाद क्या कार्रवाई सामने आती है।

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