Chatra News: चतरा जिले के टंडवा में संचालित आम्रपाली कोल परियोजना एक बार फिर सुलग उठी है। मुनाफे की अंधी दौड़ में प्रबंधन पर ग्रामीणों की भावनाओं और जान-माल को कुचलने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। इस बार निशाने पर हैं परियोजना के विवादित जीएम अमरेश कुमार सिंह, जिनके खिलाफ बिंगलात निवासी पीड़ित राजेश साव ने पुलिस अधीक्षक सुमित अग्रवाल के पास न्याय की गुहार लगाई है।

राजेश साव की आपबीती किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकती है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि जीएम की मनमानी के कारण उनका घर तहस-नहस हो गया है। आलम यह है कि घर के ठीक पीछे से कोयला निकाला जा रहा है, तो दरवाजे के सामने से भारी हाइवा मौत बनकर दौड़ रहे हैं। इसी लापरवाही और नियमों की धज्जियां उड़ाने की वजह से राजेश की वृद्ध मां की जान जा चुकी है।

‘धनबल’ और ‘घोटालों’ का पुराना नाता

आम्रपाली जीएम पर आरोप है कि वे डीजीएमएस (DGMS) के सुरक्षा मानकों को ठेंगा दिखाकर काम कर रहे हैं। चर्चा है कि लंबे समय से जमे जीएम ने अपने पद और रसूख का इस्तेमाल कर न केवल रैयतों का शोषण किया, बल्कि सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों को भी चुनौती दे डाली है। उन पर जालसाजी और वन भूमि घोटाले के आधा दर्जन से अधिक मामले पहले ही दर्ज हैं।

रिटायरमेंट से पहले हिसाब की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि जीएम अमरेश सिंह के रिटायरमेंट का समय नजदीक है, ऐसे में वे जल्दबाजी में अवैध तरीके से कोयला निकासी करवा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने अब उनके कार्यकाल के दौरान हुए धनबल के दुरुपयोग की सीबीआई जांच की मांग की है। पीड़ित राजेश साव ने एसपी से गुहार लगाई है कि उनकी मां की मौत और संपत्ति के नुकसान के जिम्मेदार जीएम पर तुरंत मुकदमा दर्ज किया जाए।

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पुलिस अधीक्षक के कार्यालय से आश्वासन मिला है कि मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी। लेकिन सवाल वही है—क्या कोयले की कालिख के नीचे दबे न्याय को बाहर निकाला जा सकेगा?

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