Ranchi: झारखंड के चतरा में हुए एयर एंबुलेंस हादसे ने विमानन सुरक्षा पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है कि जिस वक्त रांची का मौसम बेहद खराब था, उसी दौरान बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से दो अन्य कमर्शियल विमानों ने भी उड़ान भरी थी। लेकिन जहाँ इंडिगो और एयर इंडिया के विमान सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंच गए, वहीं बीचक्राफ्ट सी90 एयर एंबुलेंस टेक-ऑफ के महज कुछ मिनटों बाद ही दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
बड़े विमान सफल, छोटा विमान क्यों फेल?
सूत्रों के अनुसार, एयर एंबुलेंस के हादसे से करीब आठ मिनट पहले इंडिगो की एक फ्लाइट ने रांची से टेक-ऑफ किया था। इसके तुरंत बाद एयर इंडिया का एक और विमान रवाना हुआ। दोनों ही विमानों ने उस दौरान 3,000 फीट की ऊंचाई पर छाए खतरनाक ‘क्यूम्यूलोनिंबस’ बादलों और तूफानी हवाओं का सामना किया और सफल रहे। जानकारों का मानना है कि बड़े कमर्शियल विमानों की तुलना में छोटा ‘बीचक्राफ्ट सी90’ विमान खराब मौसम में अधिक संवेदनशील होता है।
पायलट और ATC के बीच आखिरी संवाद
जांच में पता चला है कि टेक-ऑफ के बाद जब विमान करीब 6,000 फीट की ऊंचाई पर था, तब पायलटों ने खराब मौसम से बचने के लिए कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से दाईं ओर मुड़ने की अनुमति मांगी थी। रांची एयरपोर्ट से करीब 37 किलोमीटर दूर ही यह संवाद हुआ और उसके कुछ समय बाद ही संपर्क टूट गया। अब जांच एजेंसियां पायलट के उस अंतिम फैसले और ATC के साथ हुई पूरी बातचीत के रिकॉर्ड खंगाल रही हैं।
मरीज के लिए आखिरी उम्मीद थी यह उड़ान
इस हादसे में लातेहार के चंदवा निवासी संजय कुमार को दिल्ली ले जाया जा रहा था। संजय एक ढाबा संचालक थे और आग की चपेट में आने से 65 फीसदी जल गए थे। बेहतर इलाज के लिए परिजनों ने उन्हें दिल्ली के लिए एयरलिफ्ट कराया था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। देवकमल अस्पताल के मुताबिक, मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर थी और दिल्ली ले जाना ही एकमात्र विकल्प बचा था।
अब जांच का मुख्य केंद्र विमान की तकनीकी क्षमता, पायलट का अनुभव और ATC के निर्देशों पर टिका है। यह हादसा सवाल उठाता है कि क्या छोटे विमानों को ऐसे खतरनाक मौसम में उड़ान भरने की अनुमति दी जानी चाहिए थी?
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