Ranchi: झारखंड में होने जा रहे नगर निकाय चुनाव ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के भीतर की अंदरूनी कलह को सतह पर ला दिया है। खबर है कि पूर्व मुख्यमंत्री और कद्दावर आदिवासी नेता चंपाई सोरेन पार्टी की कार्यप्रणाली से बेहद असंतुष्ट हैं। चंपाई की यह नाराजगी केवल बंद कमरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने आदित्यपुर और सरायकेला जैसे अपने गढ़ों में बीजेपी समर्थित उम्मीदवारों के खिलाफ अपने करीबियों को चुनावी मैदान में उतारकर बगावत का बिगुल फूंक दिया है।

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सूत्रों की मानें तो चंपाई सोरेन इस बात से आहत हैं कि निकाय चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन और रणनीति बनाने वाली बैठकों में उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। उन्होंने इशारों-इशारों में संगठन के कुछ प्रभावशाली नेताओं पर उन्हें जानबूझकर दरकिनार करने का आरोप लगाया है। चंपाई का कहना है कि उन्हें पार्टी की महत्वपूर्ण चर्चाओं से दूर रखा जा रहा है।

इस खींचतान का असर जमीन पर भी दिखने लगा है। आदित्यपुर नगर निगम में चंपाई समर्थक सुनीता लियांगी और सरायकेला नगर पंचायत में सानंद आचार्या ने पार्टी के आधिकारिक रुख के खिलाफ जाकर पर्चा भरा है। वहीं, बीजेपी के चुनाव प्रभारी शैलेंद्र सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि चंपाई सोरेन और उनके सहयोगियों को हर बैठक की सूचना दी जाती है, लेकिन वे स्वयं ही अनुपस्थित रहते हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि घाटशिला उपचुनाव में चंपाई के बेटे बाबूलाल सोरेन की हार के बाद से ही पार्टी के भीतर उनका प्रभाव कम करने की कोशिशें तेज हो गई थीं। चंपाई की ‘स्वतंत्र कार्यशैली’ और बीजेपी के ‘कैडर-आधारित’ ढांचे के बीच तालमेल बैठता नहीं दिख रहा है। नगर निकाय चुनाव के बहाने सामने आई यह दरार साल 2026 की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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