गमला/चैनपुर :-चैनपुर प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों वनों की अंधाधुंध कटाई का मामला गंभीर होता जा रहा है। हालात यह हैं कि वन विभाग की नाक के नीचे जंगल साफ किए जा रहे हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर ठोस कार्रवाई के बजाय केवल आश्वासन ही दिए जा रहे हैं। ताजा मामला चैनपुर के ग्रामीण इलाकों का है, जहां महिलाओं की टोलियां बनाकर जंगलों से लकड़ी की अवैध कटाई की जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि सखुआ जैसे बहुमूल्य वृक्षों के छोटे-छोटे पौधों को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। प्रतिदिन सुबह से लोग कुल्हाड़ी लेकर जंगल में घुस जाते हैं और शाम तक हरे-भरे पौधों को काटकर ले जाते हैं। यह सिलसिला लंबे समय से जारी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठा है।

समिति में बदलाव के बाद बढ़ी जंगल कटाई

वन विभाग द्वारा गठित स्थानीय समिति की पूर्व कोषाध्यक्ष जबीना खातून ने मौजूदा हालात पर गहरा असंतोष जताया है। उन्होंने बताया कि जंगलों में सखुआ के छोटे-छोटे बोटों और पौधों को बेरहमी से काटा जा रहा है, जिससे वन क्षेत्र तेजी से उजड़ रहा है।

जबीना खातून ने आरोप लगाया कि जब तक पुरानी समिति कार्यरत थी, तब तक वनों की सुरक्षा को लेकर सख्ती बरती जाती थी। नियमित निगरानी के कारण अवैध कटाई पर काफी हद तक रोक लगी हुई थी। लेकिन नई समिति के गठन के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है।
उन्होंने कहा कि वन विभाग को कई बार इस अवैध कटाई की सूचना दी गई, बावजूद इसके न तो मौके पर कोई कार्रवाई हुई और न ही दोषियों के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाया गया।

 

 

 

 

 

 

 

ग्राउंड जीरो पर दिखी भयावह स्थिति

ग्रामीणों की शिकायत पर टीम ने जब जंगल का रुख किया, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। टीम को देखते ही जंगल में लकड़ी काट रही महिलाएं सिर पर लकड़ी के गट्ठर लादकर जंगल के अंदर भागती नजर आईं। मौके पर कटे हुए सखुआ के पौधे और बिखरी लकड़ियां इस बात की गवाही दे रही थीं कि यहां बड़े पैमाने पर अवैध कटाई हो रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई एक-दो दिन की घटना नहीं है, बल्कि लंबे समय से यह सिलसिला जारी है। वन विभाग को बार-बार सूचना देने के बावजूद न तो कोई छापेमारी की जाती है और न ही लकड़ी तस्करों पर कोई प्रभावी कार्रवाई होती है। अधिकारी सिर्फ जांच और कार्रवाई का आश्वासन देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं।

 

 

 

 

 

 

 

भविष्य पर मंडराता खतरा

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते वन विभाग ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले कुछ वर्षों में चैनपुर के ये हरे-भरे जंगल केवल सरकारी कागजों तक ही सिमट कर रह जाएंगे। जंगलों के उजड़ने से न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान होगा, बल्कि आदिवासी और ग्रामीण समुदायों की आजीविका पर भी गहरा असर पड़ेगा।

अब देखना यह है कि वन विभाग इस गंभीर मामले को लेकर कब तक ठोस कार्रवाई करता है, या फिर चैनपुर के जंगल यूं ही कुल्हाड़ियों की भेंट चढ़ते रहेंगे।

Share.
Exit mobile version