Chaibasa News: सोमवार की रात सिके बरकेला क्षेत्र में स्थानीय लोगों की नजर एक 25 वर्षीय युवती पर पड़ी, जो ठंड और बारिश के बीच काफी कमजोर और असहाय दिखाई दे रही थी। कई महीनों से वह बस स्टैंड और मंगला हाट के आसपास खुले में रह रही थी। लोगों में आशंका थी कि इस दौरान उसके साथ कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा उत्पीड़न की कोशिश भी हुई होगी।
सूचना मिलते ही उरांव समाज हरकत में आया
बस स्टैंड परिसर में स्थित होटल संचालकों ने इस स्थिति को गंभीर समझते हुए उरांव समाज के उप सचिव “ब्लडमेन” लालू कुजूर को सूचना दी। उन्होंने बिना देर किए समाज की एंबुलेंस भेजकर युवती को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। उसे झींकपानी स्थित संचार वृद्धा आश्रम में दाखिल कराया गया, जहां तुरंत प्राथमिक देखभाल शुरू हुई।
पहचान हुई, दुखद पारिवारिक स्थिति का खुलासा
आश्रम में जब उससे पूछताछ हुई तो उसने अपना नाम गोरमाय सुंडी बताया। उसने यह भी बताया कि उसके पिता घनश्याम सुंडी अब जीवित नहीं हैं। उसकी हालत देखकर आश्रम प्रबंधन ने उसे सुरक्षित, शांत और उपचार योग्य वातावरण देने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
युवा साथियों ने बढ़ाया हाथ, ठंड से बचाने के लिए वस्त्र उपलब्ध
तेज ठंड को देखते हुए उरांव समाज के युवा—पंकज खलखो, शंभू कच्छप, पप्पू खलखो और अनूप यादव—ने आपसी सहयोग से स्वेटर, टोपी, मोजे और चप्पल खरीदकर युवती को दिए। इससे न केवल उसे राहत मिली, बल्कि सामाजिक सहयोग की मिसाल भी कायम हुई।
स्थानीय लोग बोले—समाज की तत्परता ने बचाई जान
आसपास के लोगों का कहना है कि यदि समय रहते समाज और होटल संचालकों ने ध्यान नहीं दिया होता, तो उसकी हालत और बिगड़ सकती थी। उरांव समाज की यह पहल अब इंसानियत और सामुदायिक जिम्मेदारी का उदाहरण बन गई है। फिलहाल आश्रम में उसकी देखभाल जारी है और समाज आगे उसके पुनर्वास की तैयारी भी कर रहा है।



