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Washington, USA: अमेरिका में हथियारों की खरीद-फरोख्त को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है, जिसने पूरे देश में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। अमेरिकी ब्यूरो ऑफ अल्कोहल, टोबैको, फायरआर्म्स एंड एक्सप्लोसिव्स (ATF) ने एक नया प्रस्ताव रखा है। इसके तहत अब लाइसेंस्ड हथियार विक्रेता योग्य ग्राहकों के घर तक सीधे बंदूकों की होम डिलीवरी कर सकेंगे। इस नए प्रस्ताव के सामने आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे, डोनाल्ड ट्रंप जूनियर अचानक विवादों और चर्चाओं के केंद्र में आ गए हैं।
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क्यों चर्चा में आए डोनाल्ड ट्रंप जूनियर?
दरअसल, इस नए प्रस्ताव के बाद ट्रंप जूनियर का नाम इसलिए उछल रहा है क्योंकि वह ऑनलाइन हथियार बेचने वाली दिग्गज कंपनी ‘ग्रैबएगन’ (GrabAGun) के बोर्ड मेंबर और एक बड़े शेयरहोल्डर हैं। इस कंपनी को अमेरिका में ‘बंदूकों का अमेजन’ भी कहा जाता है। आलोचकों का मानना है कि घर तक हथियार पहुंचाने की अनुमति मिलने से ऐसी ऑनलाइन कंपनियों की चांदी हो जाएगी। हालांकि, ट्रंप जूनियर के प्रवक्ता एंड्रयू सुराबियन और कंपनी के सीईओ मार्क नेमाती ने इस नीति को तैयार करने में किसी भी तरह की भूमिका या पूर्व जानकारी होने से साफ इनकार किया है।
क्या हैं वर्तमान नियम और क्या बदलेगा?
मौजूदा नियमों के तहत यदि कोई अमेरिकी नागरिक ऑनलाइन बंदूक खरीदने की प्रक्रिया पूरी करता है, तब भी उसे फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए लाइसेंस्ड गन डीलर की दुकान पर जाना पड़ता है, जहां उसका बैकग्राउंड चेक होता है। लेकिन नए प्रस्ताव के लागू होने पर ग्राहकों को दुकान जाने की कोई जरूरत नहीं होगी। वे ऑनलाइन ही अपनी पहचान सत्यापित करेंगे, डिजिटल बैकग्राउंड चेक पास करेंगे और सात दिन के अनिवार्य इंतजार व लोकल पुलिस को सूचना देने के बाद गन सीधे घर मंगा सकेंगे। हालांकि, इस प्रस्ताव से छोटे गन डीलर बेहद चिंतित हैं, क्योंकि इससे उनकी वेरिफिकेशन फीस और गोला-बारूद की रिटेल बिक्री पर सीधा असर पड़ेगा।
मास शूटिंग के खौफनाक आंकड़ों के बीच आया प्रस्ताव
यह पूरा बंदूक खरीदने का नया विवाद ऐसे समय में गर्माया हुआ है जब अमेरिका पहले से ही गन वॉयलेंस (बंदूक हिंसा) से जूझ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में अमेरिका में रिकॉर्ड 408 मास शूटिंग की घटनाएं हुईं, जिनमें 395 लोगों ने अपनी जान गंवाई और 1867 लोग घायल हुए। उसी वर्ष देश में करीब 1.47 करोड़ बंदूकें बेची गईं। हालांकि, एटीएफ का तर्क है कि आधुनिक ऑनलाइन सत्यापन प्रणाली पारंपरिक तरीके से भी ज्यादा सुरक्षित साबित होगी। फिलहाल इस प्रस्ताव पर अगस्त 2026 की शुरुआत तक आम जनता से राय मांगी गई है, और यदि इसे मंजूरी मिलती भी है, तो यह नियम 2026 के आखिर या उसके बाद ही लागू हो पाएगा।

