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भवन आलीशान, खर्च करोड़ों, कुर्सियां खाली : संवैधानिक संकट पर भाजपा ने खोला मोर्चा

रांची: झारखंड में संवैधानिक संस्थाओं की बदहाली को लेकर सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने मंगलवार को हेमंत सरकार पर सीधा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार एक सोची-समझी साजिश के

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रांची: झारखंड में संवैधानिक संस्थाओं की बदहाली को लेकर सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने मंगलवार को हेमंत सरकार पर सीधा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार एक सोची-समझी साजिश के तहत लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है। शाहदेव ने कहा कि हाईकोर्ट की फटकार भी अब इस सरकार पर बेअसर साबित हो रही है।

कुर्सियां खाली, जनता का पैसा पानी की तरह बह रहा

प्रतुल शाहदेव ने आंकड़ों और जमीनी हकीकत का हवाला देते हुए कहा कि लोकायुक्त, सूचना आयोग, महिला आयोग और बाल संरक्षण आयोग जैसे महत्वपूर्ण संस्थान आज ‘नेतृत्व विहीन’ हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन आयोगों के पास बड़े-बड़े भवन हैं, गाड़ियां हैं और कर्मचारियों की फौज भी तैनात है, जिन पर हर साल राज्य के खजाने से करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन, जब किसी आम नागरिक को न्याय या सूचना चाहिए होती है, तो उसे खाली कुर्सियां मिलती हैं। प्रतुल ने इसे जनता की गाढ़ी कमाई की “खुली बर्बादी” करार दिया।

“भ्रष्टाचार और जवाबदेही से डरती है सरकार”

भाजपा प्रवक्ता ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन पदों को जानबूझकर नहीं भरा जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि लोकायुक्त सक्रिय हो गए, तो भ्रष्टाचार पर नकेल कस जाएगी। अगर सूचना आयोग में आयुक्तों की नियुक्ति हो गई, तो सरकार की फाइलों की पारदर्शिता बाहर आ जाएगी। इसी तरह महिला और बाल आयोग को निष्क्रिय रखना समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जो सरकार खुद को पारदर्शी कहती है, वह संवैधानिक संस्थाओं के सामने आने से इतना क्यों डर रही है?”

न्यायपालिका के हस्तक्षेप पर चिंता

शाहदेव ने इस बात पर भी चिंता जताई कि झारखंड उच्च न्यायालय को बार-बार सरकार को उसकी जिम्मेदारियां याद दिलानी पड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है कि प्रशासनिक नियुक्तियों के लिए भी कोर्ट को डंडा चलाना पड़े। भाजपा ने दो-टूक शब्दों में मांग की है कि सरकार अविलंब इन रिक्त पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति करे, वरना यह मान लिया जाएगा कि सरकार जानबूझकर राज्य में अराजकता और अपारदर्शिता को बढ़ावा दे रही है।

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