रांची : भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में रविवार को आर्थिक प्रकोष्ठ के तत्वावधान में बजट परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पार्टी के वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि, बुद्धिजीवी और विभिन्न पेशेवर वर्गों के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार नौवीं बार प्रस्तुत किए गए केंद्रीय बजट भाषण का सामूहिक रूप से श्रवण किया गया।
इस कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी विशेष रूप से उपस्थित रहे। बजट भाषण के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद आदित्य साहू ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे सर्वसमावेशी, विकासोन्मुख और रोजगार सृजन को प्राथमिकता देने वाला बजट बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट गरीब, किसान और महिला केंद्रित है तथा देश के आर्थिक विकास के लिए अनेक नए अवसरों का सृजन करता है। रेल, सड़क, स्वास्थ्य, लघु एवं कुटीर उद्योग जैसे बुनियादी क्षेत्रों को सशक्त करने वाले प्रावधान आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती प्रदान करेंगे।
आदित्य साहू ने कहा कि यह बजट नए संकल्पों, नए सुधारों और कर्तव्यों की भावना को मजबूत करता है। उनके अनुसार, बजट में न केवल वर्तमान जरूरतों का ध्यान रखा गया है, बल्कि आने वाले वर्षों की चुनौतियों को भी ध्यान में रखते हुए दूरदर्शी योजनाएं शामिल की गई हैं।
वहीं बजट भाषण के पश्चात मीडिया से बातचीत करते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इसे ‘विकसित भारत’ की दिशा में निर्णायक बजट करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बजट महात्मा गांधी के आत्मनिर्भर और समावेशी भारत के सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ता है। रोजगार सृजन, बुनियादी ढांचे के विस्तार और सामाजिक संतुलन पर विशेष जोर इस बजट की प्रमुख विशेषता है।
प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने कहा कि यह बजट ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा को और अधिक सशक्त करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे देश की एकता, आर्थिक मजबूती और सामाजिक समरसता को नई ऊर्जा मिलेगी।
कार्यक्रम में प्रदेश महामंत्री एवं सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा, मनोज कुमार सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी बजट की सराहना की। कार्यक्रम का संचालन प्रदेश कोषाध्यक्ष दीपक बंका ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन आर्थिक प्रकोष्ठ के संयोजक सीए जे.पी. शर्मा ने किया।
इस अवसर पर चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सेक्रेटरी, प्राध्यापक, अधिवक्ता, चिकित्सक और विभिन्न संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों की उपस्थिति ने परिचर्चा को और भी सार्थक बना दिया।



