La Paz, (Bolivia): दक्षिण अमेरिकी देश बोलीविया में जारी गंभीर आर्थिक संकट के बीच अब आम जनता हिंसक प्रदर्शनों और चक्काजाम के खिलाफ उठ खड़ी हुई है। बोलीविया में सड़क जाम करने और सरकार पर दबाव बनाने की कोशिशों के खिलाफ वहां के स्थानीय लोगों ने एक विशाल रैली निकालकर अपना कड़ा विरोध जताया है। यह जन-प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है, जब इससे ठीक पहले ईंधन (Fuel) की कीमतें बढ़ाने के सरकारी फैसले के विरोध में देश के कई हिस्सों में बेहद हिंसक आंदोलन भड़क चुके थे।
आर्थिक तंगी के बीच आम लोगों की बढ़ीं मुश्किलें
बोलीविया की प्रशासनिक राजधानी ला पाज (La Paz) समेत देश के अन्य प्रमुख शहरों में निकली इस रैली में बहुत बड़ी संख्या में आम नागरिकों और कामकाजी लोगों ने हिस्सा लिया। रैली में शामिल प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर कहना था कि मांगें मनवाने के लिए सड़कें बंद करना, आवश्यक आवागमन रोकना और सार्वजनिक जीवन को पूरी तरह बाधित करना किसी भी समस्या का सही समाधान नहीं है। नागरिकों ने तर्क दिया कि देश पहले ही भारी आर्थिक दबाव, डॉलर की किल्लत और लगातार बढ़ती महंगाई से जूझ रहा है; ऐसे में हिंसा, तोड़फोड़ और रास्तों को रोकना आम लोगों की रोजी-रोटी और मुश्किलों को और ज्यादा बढ़ा रहे हैं।
ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के बाद भड़की थी हिंसा
गौरतलब है कि पिछले दिनों सरकार द्वारा ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी करने के फैसले के बाद बोलीविया के कई प्रांतों में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए थे। उग्र प्रदर्शनकारियों द्वारा कुछ संवेदनशील इलाकों में आगजनी, पत्थरबाजी और सुरक्षा बलों (पुलिस) के साथ सीधी झड़पें की गईं, जिससे पूरा सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया था। इस हिंसा के कारण स्थानीय दुकानदारों, कारोबारियों और आम निवासियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। इसी हिंसक पृष्ठभूमि के बीच अब नागरिकों द्वारा निकाली गई इस विरोधी रैली को देश में शांति, स्थिरता और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की एक मजबूत अपील के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार से बातचीत और संवाद की मांग
रैली में शामिल प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने राष्ट्रपति और सरकार से प्रदर्शनकारियों के साथ तुरंत संवाद का रास्ता अपनाने की पुरजोर मांग की है। लोगों का कहना है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और अन्य आर्थिक सुधारों पर जनता को विश्वास में लिए बिना लिया गया कोई भी एकतरफा फैसला देश में सामाजिक तनाव को और ज्यादा बढ़ाएगा। दूसरी ओर, बोलीविया प्रशासन का कहना है कि वह जमीनी हालात पर पूरी नजर बनाए हुए है और देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी तरह की अराजकता या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बोलीविया की यह नाजुक स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाती है कि वैश्विक स्तर पर लिए जाने वाले कठिन आर्थिक फैसलों का असर सिर्फ शेयर बाजार पर नहीं, बल्कि सीधे देश की सड़कों पर जनता के आक्रोश के रूप में भी दिखाई देता है। अब अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बोलीविया सरकार बातचीत के जरिए हालात को शांत कर पाती है या देश राजनीतिक अस्थिरता की ओर बढ़ता है।
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