Bokaro news: बोकारो इस्पात संयंत्र के विस्तारीकरण, आधुनिकीकरण, विस्थापित, अप्रेंटिस विस्थापित युवाओं के रोजगार, मृत कर्मचारियों आश्रितों के नियोजन, आवासों में अतिक्रमण एवं नागरिक सुविधाओं जैसे मुद्दे प पूर्व सांसद पशुपति नाथ सिंह ने मंगलवार की देर शाम निदेशक प्रभारी प्रिय रंजन से उनके कार्यालय कक्ष में विस्तार से बातचीत की। श्री सिंह ने कहा कि विस्तारीकरण एवं आधुनिकीकरण के कार्य ने गति लाने की जरूरत है, क्योंकि इस पर बोकारो का भविष्य निर्भर है।

गौरतलब है कि विस्तारीकरण और आधुनिकीकरण को लेकर श्री सिंह पिछले कई वर्षों से प्रयासरत रहे हैं। इस विषय पर उन्होंने कई बार सेल, चेयरमैन से गंभीर चर्चा की थी।

पूर्व सांसद के प्रतिनिधि ए के वर्मा ने बताया है कि निदेशक प्रभारी ने संयंत्र से जुड़े समस्त योजनाओं और कार्यों अद्यतन स्थिति की जानकारी दी। श्री रंजन ने बताया कि विस्तार योजना के तहत 4500 घनमीटर क्षमता का नया ब्लास्ट फर्नेस, थिन स्लैब कास्टिंग एवं डायरेक्ट रोलिंग सुविधा, स्टैम्प-चार्ज्ड कोक ओवन बैटरी, कैल्साइनिंग प्लांट तथा सिंटर प्लांट विस्तार जैसी आधुनिक इकाइयाँ स्थापित की जानी हैं।

परियोजना का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि संयंत्र को आधुनिक एवं ऊर्जा दक्ष बनाना भी है। इसके तहत सौर ऊर्जा, कार्बन उत्सर्जन में कमी तथा उन्नत उत्पादन तकनीकों को शामिल किया जा रहा है। इससे उत्पादन लागत घटाने और उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात के निर्माण में मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया, वर्तमान में परियोजना को लेकर शुरुआती चरण में कुछ अवसंरचनात्मक चुनौतियाँ सामने आई थीं। विशेष रूप से वैकल्पिक जलापूर्ति व्यवस्था के अभाव के कारण 2025 में कार्यान्वयन की गति प्रभावित हुई थी।

हालांकि, 2026 की शुरुआत में परियोजना को नया बल मिला है। बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन ने विस्तार कार्य के लिए आवश्यक “एनैबलिंग पैकेजों” के टेंडर जारी कर दिए गए हैं, जिससे परियोजना के क्रियान्वयन चरण में प्रवेश करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
बताया गया है कि विस्तार परियोजना से लगभग 2,500 प्रत्यक्ष और 10,000 अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। साथ ही बोकारो और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक एवं आर्थिक गतिविधियों को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।

बोकारो स्टील प्लांट में विस्थापितों, अप्रेंटिस विस्थापितों और मृत कर्मचारियों के आश्रितों के नियोजन की वर्तमान स्थिति के संबंध में बताया गया है कि वर्तमान में दूसरी और तीसरी पीढ़ी के विस्थापित परिवारों के अनेक युवाओं ने बीएसएल और उससे जुड़े प्रशिक्षण संस्थानों में अप्रेंटिसशिप एवं तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त की है, उन युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की कोशिश जारी है।

बीएसएल में मृत कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान कंपनी की सेवा-नियमावली के अनुसार लागू रहता है। लेकिन यह नियुक्ति रिक्तियों, पात्रता और निर्धारित नियमों के अधीन होती है। हाल के वर्षों में नियमित भर्ती कम होने और संविदा व्यवस्था बढ़ने के कारण आश्रित नियुक्तियों की संख्या भी सीमित रही है। आवश्यकतानुसार उन्हें मौका दिया जाएगा।

पूर्व सांसद ने कहा कि विस्तारीकरण एवं आधुनिकीकरण की 20,000 करोड़ रुपये की परियोजना के कार्य में विस्थापित और अप्रेंटिस युवाओं को रोजगार देने की आवश्यकता है, ताकि वे अपना और अपने परिवार का बॉर्न पोषण कर सकें।
निदेशक प्रभारी ने श्री सिंह को जानकारी दी कि प्रबंधन रोजगार के बजाय स्वरोजगार एवं पुनर्वास योजनाओं पर भी जोर दे रहा है। इसी क्रम में 2026 में विस्थापित परिवारों के लिए 96 दुकानों के आवंटन की योजना शुरू की गई है ताकि उन्हें आजीविका के वैकल्पिक अवसर मिल सकें।

इसके अलावा श्री सिंह ने जर्जर आवास और अतिक्रमण को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि आवासों के अनुरक्षण और लाइसेंस पर आवास आवंटन में गति लाने से अतिक्रमण की समस्या का समाधान हो सकता है। खाली आवास रहने के कारण अतिक्रमण हो रहा है। उन्होंने नगर के सीवर लाइन के अनुरक्षण को आवश्यक बताया। श्री सिंह ने कहा कि बरसात के समय में प्रत्येक सेक्टर में सड़क पर सीवर का पानी बहता है।

निदेशक प्रभारी श्री रंजन ने पूर्व सांसद को आश्वस्त किया कि उनके उठाए प्रत्येक बिंदु पर गंभीरता से विचार विमर्श कर कार्योंको गति दी जाएगी।

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