India News: देश के सबसे बड़े राजनीतिक दल, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में जल्द ही एक बड़ा संगठनात्मक फेरबदल देखने को मिल सकता है। संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी को जल्द ही अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने वाला है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा सहित कई बड़े नेताओं की उच्च स्तरीय बैठकें हुईं, जिससे इन अटकलों को और बल मिला है।

पार्टी सूत्रों के हवाले से खबरें हैं कि बीजेपी नेतृत्व 15 दिसंबर से पहले नए अध्यक्ष का चुनाव कर सकता है। इसकी मुख्य वजह 16 दिसंबर से शुरू हो रहा खरमास का महीना बताया जा रहा है, जिसे हिंदू पंचांग के अनुसार शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता।

यूपी अध्यक्ष का भी ऐलान बाकी, क्या बन गई है सहमति?

राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के साथ ही, उत्तर प्रदेश (यूपी) जैसे महत्वपूर्ण राज्य के प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर भी फैसला हो चुका है, ऐसी अटकलें हैं। हाल ही में संगठन महामंत्री संतोष की यूपी यात्रा, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार से मुलाकात की थी, इस बात का स्पष्ट संकेत देती है कि यूपी की कमान किसे सौंपी जाएगी, यह तय हो चुका है। हालांकि, आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।

नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन को लेकर पार्टी में इसलिए भी तेज़ी है क्योंकि 2026 में कई महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। नेताओं का मानना है कि इन चुनावों से पहले संगठन को नई ऊर्जा और नया नेतृत्व मिलना आवश्यक है।

रेस में कई बड़े और चौंकाने वाले नाम शामिल हैं। अटकलें हैं कि महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, अनुभवी केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भूपेंद्र यादव और बीजेपी नेता विनोद तावड़े जैसे बड़े चेहरे मैदान में हैं। महिला नेताओं में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, डी पुरंदेश्वरी और वनति श्रीनिवासन का नाम भी आगे चल रहा है।

मौजूदा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा का कार्यकाल 2024 लोकसभा चुनाव से पहले ही पूरा हो चुका था, जिसके बाद उन्हें कई बार विस्तार दिया गया। बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत के बाद, राजनीतिक गलियारों में धर्मेंद्र प्रधान का नाम रेस में सबसे आगे माना जा रहा है। देखना यह होगा कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व किसके नाम पर मुहर लगाकर संगठन को 2026 के चुनावों के लिए तैयार करता है।

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