PATNA: मानसून की भारी बारिश और उफनती नदियों के कारण बिहार के करीब 12 से 13 जिले इस समय बाढ़ की गंभीर चुनौती से जूझ रहे हैं। लाखों की आबादी जलजमाव और विस्थापन की मार झेल रही है। ऐसे संकट के समय में प्रशासनिक संवेदनशीलता और जमीनी मौजूदगी पीड़ितों के लिए सबसे बड़ा संबल बनती है। इसी क्रम में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी स्वयं बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचे और जमीनी हकीकत का जायजा लिया। उनकी इस जमीनी सक्रियता और मानवीय दृष्टिकोण की तस्वीरें सामने आने के बाद चारों तरफ उनकी सराहना हो रही है।
हाजीपुर और सोनपुर के शिविरों में पहुंचे, खुद परोसा भोजन
सम्राट चौधरी ने वैशाली और सारण जिले के सुदूर बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने हाजीपुर और सोनपुर में बनाए गए राहत शिविरों का बारीकी से निरीक्षण किया। शिविरों में उन्होंने न केवल शरणार्थियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं, बल्कि राहत शिविर में अपने हाथों से लोगों को खाना परोसा और जमीन पर उनके साथ बैठकर भोजन भी किया। इसके अलावा उन्होंने बच्चों के शैक्षणिक शिविरों में जाकर उनकी पढ़ाई और पोषण की स्थिति जांची।
4-4 लाख रुपये का मुआवजा और फसल क्षति का आकलन
बाढ़ की चपेट में आकर जान गंवाने वाले मृतकों के आश्रितों को सरकार की ओर से 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि सौंपी गई। किसानों की चिंता को दूर करते हुए उन्होंने कहा कि बाढ़ से बर्बाद हुई फसलों का त्वरित आकलन कराया जा रहा है और प्रभावित किसानों को पूरा मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही, स्वास्थ्य शिविरों में 24 घंटे दवाइयों और पशु शिविरों में चारे की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के कड़े निर्देश अधिकारियों को दिए।
ग्राउंड पर 1,740 नावें और 238 कम्युनिटी किचन

आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, राहत कार्यों को बड़े पैमाने पर संचालित किया जा रहा है:
राहत शिविर व भोजन: राज्य में 12 प्रमुख राहत शिविरों में 7,368 लोगों के रहने, चिकित्सा और भोजन का प्रबंध है। इसके अलावा 238 सामुदायिक रसोइयों (कम्युनिटी किचन) के जरिए अब तक 5.12 लाख थाली भोजन वितरित किया जा चुका है।
राशन व राहत सामग्री: 92,600 पॉलीथिन शीट और 19,100 ड्राई राशन पैकेट जरूरतमंदों तक पहुंचाए गए हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन: सुरक्षित आवागमन के लिए 1,740 सरकारी नावें चलाई जा रही हैं, जबकि एनडीआरएफ की 10 और एसडीआरएफ की 27 टीमें लगातार बचाव में जुटी हैं।
पीड़ितों ने जताई संतुष्टि

वैशाली के नरेश भगत और पटना के सूर्यनारायण बताते हैं कि उन्होंने जीवन में कई बार बाढ़ झेली है, लेकिन इस बार शिविरों में भोजन, बच्चों के लिए दूध, दवाइयां और मवेशियों के चारे का प्रबंध बेहद सुव्यवस्थित है। सरकार के शीर्ष नेतृत्व का खुद जमीन पर उतरना पीड़ितों का मनोबल बढ़ा रहा है।




