रांची: झारखंड की राजधानी रांची में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे कानून की आंखों में धूल झोंककर ‘संगठित गिरोह’ के रूप में प्रतिबंधित गौवंशीय अवशेषों का व्यापार कर रहे हैं। नामकुम थाना क्षेत्र में बुधवार तड़के पुलिस ने एक ऐसे ही सनसनीखेज तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो अंधेरे का फायदा उठाकर शहर के बीचों-बीच मौत का सामान ढो रहा था

फिल्मी अंदाज में पीछा और गिरफ्तारी

यह घटना 12 मई की देर रात शुरू हुई, जब नामकुम पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली कि कांटाटोली की ओर से एक एलपीटी (LPT) ट्रक (रजिस्ट्रेशन संख्या- JH02AG3490) भारी मात्रा में प्रतिबंधित गौवंशीय हड्डियां लादकर चान्हो की ओर जा रहा हैसूचना मिलते ही पुलिस अवर निरीक्षक मिथुन कुमार ने अपनी टीम के साथ मोर्चा संभाला

रात के करीब 11:25 बजे, पुलिस ने सिदरौल के पास उक्त ट्रक को देखा । पुलिस की गाड़ी देखते ही ट्रक ड्राइवर ने रफ्तार बढ़ा दी और भागने की कोशिश की। अंधेरी सड़क पर कुछ किलोमीटर तक चले ‘हाई-स्पीड चेस’ के बाद पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए रामपुर चौक से पहले ही ट्रक को घेरकर रोक लिया

ट्रक में छिपा था ‘मौत का जखीरा’

जब पुलिस ने ट्रक की तलाशी ली, तो उसमें मौजूद सामान देखकर सभी दंग रह गए। ट्रक में करीब 4710 किलोग्राम (लगभग 4.7 टन) प्रतिबंधित गौवंशीय हड्डियां लदी हुई थीं ट्रक चालक, जिसकी पहचान मुन्ना अंसारी (चतरा निवासी) के रूप में हुई, ने कबूल किया कि वह लंबे समय से इस संगठित गिरोह के लिए काम कर रहा है और पूर्व में भी कई बार ऐसी खेप पहुंचा चुका है

सेटिंग करने पहुंचे ‘आका’ भी पुलिस के हत्थे चढ़े

कार्रवाई के दौरान ही एक और चौंकाने वाला मोड़ आया। जब पुलिस ट्रक की जांच कर रही थी, तभी एक सफेद रंग की कोरोलिया कार (सं0-JH05N 9441) वहां पहुंची। कार से उतरे चार व्यक्तियों ने न केवल उस अवैध माल पर अपना दावा जताया, बल्कि पुलिस के साथ ‘मोल-भाव’ (सेटिंग) करने की भी कोशिश की

हालांकि, पुलिस की सख्ती और गश्ती दल को आते देख वे भागने लगे। पुलिस ने पीछा कर इनमें से तीन आरोपियों अल्ताब खान, सफाक कुरैशी और मो. नौशाद को धर दबोचागिरोह का चौथा सदस्य, तनवीर आलम उर्फ बाबू अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा

व्हाट्सएप रिपोर्टिंग के दौर में अपराध का ‘सॉफ्टवेयर’

एक तरफ जहां राज्य का स्वास्थ्य विभाग पैथोलॉजी रिपोर्ट सीधे मरीजों के व्हाट्सएप पर भेजने जैसी आधुनिक तकनीक अपना रहा है, वहीं दूसरी ओर अपराधी भी ‘हाई-टेक’ हो गए हैं। इस गिरोह के पास से तीन एंड्रॉइड मोबाइल बरामद हुए हैं, जिनका उपयोग वे तस्करी के नेटवर्क को संचालित करने के लिए करते थेजांच में पता चला कि ये हड्डियां कांटाटोली स्थित पप्पू कुरैशी और रिंकू कुरैशी के डंपिंग यार्ड से लोड की गई थीं और इन्हें चान्हो स्थित फरियाद कुरैशी की फैक्ट्री में भेजा जाना था

संगठित अपराध की धाराएं और कानूनी शिकंजा

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 111(2)(b), 111(3), 111(4) (जो संगठित अपराध से संबंधित हैं) और झारखंड गौवंशीय पशु हत्या प्रतिषेध अधिनियम 2005 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है

जब्त की गई संपत्तियां:

  • 4.7 टन प्रतिबंधित हड्डियां

  • LPT ट्रक (JH02AG3490)

  • कोरोलिया कार (JH05N 9441)

  • काला रंग का IQ एंड्रायड मोबाइल

  • तीन स्मार्टफोन

पशु चिकित्सक की प्रारंभिक जांच में पुष्टि हुई है कि बरामद अवशेष गौवंशीय हैंअब विस्तृत रिपोर्ट के लिए नमूनों को विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL), होटवार भेजा गया हैफिलहाल पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है और इस सिंडिकेट के अन्य संपर्कों को खंगाल रही है

पुलिस द्वारा चिन्हि्त आराेपी

  • मुन्ना अंसारी, पिता-मो तुफानी
  • अलताब खान, पिता-स्व सतार खान
  • सफाक कुरैशी, पिता-हाफिज कुरैशी
  • मो0 नौशाद, पिता-जमाल कुरैशी
  • पप्पु कुरैशी, पिता-फेकु कुरैशी
  • रिंकू कुरैशी, पिता-फेकु कुरैशी
  • रूमी कुरैशी, पिता-डॉक्टर
  • फरियाद कुरैशी, पिता-नामालूम
  • तनवीर आलम उर्फ बाबु, पिता-शमशुल हक
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