Patna: बिहार की राजनीति में ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर मोकामा विधायक अनंत सिंह के समर्थकों में आज जश्न का माहौल है। पटना हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए दुलारचंद यादव हत्याकांड में उन्हें नियमित जमानत दे दी है। निचली अदालत से अर्जी खारिज होने के बाद अनंत सिंह ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां से उन्हें बड़ी राहत मिली है। फिलहाल वे पटना की बेऊर जेल में बंद हैं और कागजी कार्यवाही पूरी होते ही उनकी रिहाई मुमकिन होगी।

क्या है दुलारचंद यादव हत्याकांड?

यह मामला अक्टूबर 2025 का है, जब बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान जन सुराज पार्टी के समर्थक दुलारचंद यादव की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में अनंत सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया था। चुनाव के दौरान ही उनकी गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि जेल की सलाखों के पीछे रहते हुए भी उन्होंने मोकामा की जनता का भरोसा जीता और भारी मतों से विजयी हुए।

राज्यसभा चुनाव में दिखी थी ‘भविष्यवाणी’

अभी बीते 16 मार्च को ही बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए मतदान हुआ था। इस दौरान अनंत सिंह विशेष अनुमति लेकर जेल से वोट डालने पहुंचे थे। उन्होंने जदयू उम्मीदवार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पक्ष में मतदान किया था। वोट डालने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए अनंत सिंह ने बड़े आत्मविश्वास के साथ कहा था, “जल्द ही जेल से बाहर आऊंगा।” आज हाईकोर्ट के फैसले ने उनके उस दावे पर मुहर लगा दी है।

राजनीति से संन्यास और नई पीढ़ी का उदय

जमानत मिलने के साथ ही अनंत सिंह के एक और बयान ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने साफ कर दिया है कि अब वे खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे। अनंत सिंह ने घोषणा की है कि उनकी राजनीतिक विरासत को अब उनके बड़े बेटे आगे बढ़ाएंगे। बता दें कि शपथ ग्रहण के दौरान भी अनंत सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पैर छूकर आशीर्वाद लिया था, जिससे यह संकेत मिल गए थे कि उनके और सरकार के बीच जमी बर्फ पिघल चुकी है। अब जेल से बाहर आने के बाद मोकामा और बिहार की राजनीति में क्या नए समीकरण बनते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।

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